` युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके पुष्कर सिंह धामी बने प्रदेश के 11 वे मुख्यमंत्री

युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके पुष्कर सिंह धामी बने प्रदेश के 11 वे मुख्यमंत्री

पुष्कर सिंह धामी बने प्रदेश के 11 वे मुख्यमंत्री, कल शाम 5 बजे लेंगे शपथ 

देहरादून। तीरथ सिंह रावत जी के इस्तीफ़ा देने के बाद सब यही सोच रहे थे कि अब मुख्यमंत्री पद के लिए अगला उम्मीदवार कौन होगा, क्योंकि यह वक़्त ऐसा है जब राज्य को एक ऐसा नेता चाहिए जो धर्म, प्रान्त, जाति या भाषा के आधार पर राजनीति ना करे, उसके लिए राज्य का प्रत्येक व्यक्ति समान हो | 

new-chief-minister-of-uttarakhand


यह देखते हुए पुष्कर सिंह धामी जो को राज्य का नया मुख्यमंत्री बनाया गया है | धामी जी भारतीय जनता पार्टी की और से खटीमा क्षेत्र से 2 बार विधायक रह चुके हैं और युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके है  |

चलिए जानते हैं  पुष्कर सिंह धामी जी के बारे में 

पुष्कर सिंह धामी जी का जन्म उत्तराखण्ड के अति सीमान्त जनपद पिथौरागढ की ग्राम सभा टुण्डी, तहसील डीडी हाट में हुआ। धामी जी एक सैनिक के पुत्र थे इसलिए राष्ट्रीयता, सेवा भाव एवं देशभक्ति प्रारम्भ से ही इनके खून में थी । आर्थिक स्थिति ठीक ना होने कि वजह से प्राथमिक शिक्षा सरकारी स्कूलों से ग्रहण की | क्योंकि तीन बड़ी बहनों के बाद धामी जी चौथे पुत्र थे इसलिए इनके ऊपर शुरू से ही काफी जिम्मेदारियां थी |

धामी जी की माता का नाम श्रीमती विश्वा देवी तथा पत्नी का नाम श्रीमती गीता धामी है,  धामी जी की शैक्षणिक योग्यता  स्नातकोत्तर है तथा मानव संसाधन प्रबंधन और औद्योगिक संबंध के मास्टर हैं |धामी जी का जन्म 16.09.1975 को हुआ था |

कैसा रहा धामी जी का प्रारंभिक जीवन

जैसा कि धामी जी के पिताजी एक सैनिक थे तो बचपन से ही धामी जी सेना से प्यार तथा सैनिकों कि इज्जत करते थे और देशभक्ति की भावना उनके मन में बचपन से ही थी | बचपन से ही प्रदेश के लिए कुछ कर जाने की इच्छा रखते हुए धामी जी स्काउट गाइड, एन सी सी , एन एस एस इत्यादि शाखाओं में भाग लिया करते थे |

लखनऊ विश्वविद्यालय में  शिक्षा व्यवस्था के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी, उन्होंने छात्रों को एक जुट करके निरन्तर संधर्षशाील रहते हुए उनके शैक्षिणक हितों की लडाई लडते हुए उनके अधिकार दिलाये | राजनितिक दल भारतीय जनता पार्टी से जुडने का कारण भी राष्ट्रीयता, देशभक्ति, कमजोर एवं युवा बेरोजगार के प्रति कुछ कर गुजरने की भावना रही। यही राजनिति में आने का उदे्श्य रहा।

धामी जी का राजनीतिक जीवन

धामी जी की राजनीतिक यात्रा सन् 1990 से प्रारम्भ हुई उन्होंने 1990 से 1999 तक जिले से लेकर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में विभिन्न पदों में रहकर विद्यार्थी परिषद में कार्य किया है। इसी दौरान अलग-अलग दायित्वों के साथ-साथ प्रदेश मंत्री के तौर पर लखनऊ में हुये अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय सम्मेलन में संयोजक एवं संचालन कर प्रमुख भूमिा निभाई।

राज्य की भौगोलिक परिस्थियों को नजदीक से समझते हुए क्षेत्रीय समस्याओं की समझ और उत्तराखण्ड राज्य गठन के उपरान्त पूर्व मुख्यमंत्री के साथ एक अनुभवी सलाहकार के रूप में 2002 तक कार्य किया। कुशल नेतृत्व क्षमता, संधर्षशीलता एवं अदम्य सहास के कारण दो बार भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए सन 2002 से 2008 तक छः वर्षो तक लगातार पूरे प्रदेश में जगह-जगह भ्रमण कर युवा बेरोजगार को संगठित करके अनेकों विशाल रैलियां एवं सम्मेलन आयोजित किये गये। 

संधर्षो के परिणाम स्वरूप तत्कालीन प्रदेश सरकार से स्थानीय युवाओं को 70 प्रतिशत आरक्षण राज्य के उद्योगों में दिलाने में सफलता प्राप्त की। इसी क्रम में दिनांक 11.01.2005 को प्रदेश के 90 युवाओं को जोड़कर विधान सभा का धेराव हेतु एक ऐतिहासिक रैली आयोजित की गयी जिसे युवा शक्ति प्रदर्शन के रूप में उदाहरण स्वरूप आज भी याद किया जाता है।

पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में वर्ष 2010 से 2012 तक शहरी विकास अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष के रूप में कार्यशील रहते हुए क्षेत्र की जनता की समस्याओं का समाधान कराने में आशातीत सफलता प्राप्त की जिसका प्रतिफल जनता द्वारा 2012 के विधान सभा विधान सभा चुनाव में ’’विजयश्री’’ दिलाते हुए अपने जनप्रिय विधायक के रूप में विधान सभा में पहुॅचाकर उनकी आवाज को और भी अधिक बुलन्दी के साथ सरकार के समक्ष उठाते हुए क्षेत्रीय जनता को उनके मौलिक अधिकारों एवं जीवन यापन के हकों को दिलवाने के लिए उनके विधानसभा प्रतिनिध होने का गौरव प्राप्त हुआ है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ