` प्रकृति के कहर के सामने असहाय थे बेजुबान जानवर ( पिथौरागढ़ के मुनस्यारी में टूटा ग्लेशियर )

प्रकृति के कहर के सामने असहाय थे बेजुबान जानवर ( पिथौरागढ़ के मुनस्यारी में टूटा ग्लेशियर )

ग्लेशियर टूटने से बर्फ में दब कर मरी 100 से अधिक भेंड बकरियां 

पिथौरागढ़ जिले में मुनस्यारी के मल्ला जोहार मे नंदा देवी बेस कैंप के पास गलेशियर के टूटने से बुग्याल मे चर रहीं 100 से अधिक भेड़, बकरियाँ बर्फ मे दब गई और चरवाहों का राशन और अन्य सामान भी दब गया। संचार सुविधा न होने के कारण 4 दिन बाद घटना का खुलासा तब हुआ जब वहां से मुनस्यारी आये एक ग्रामीण ने सूचना दी |

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सामान्यतः मुनस्यारी के चरवाहे अपनी भेंड बकरियां चराने नंदा देवी वेस कैंप की ओर ही जाते हैं तो उस समय भी चरवाहे वही. गए हुए थे | प्रकृति के सामने किसका जोर चल पाया है, चरवाहे ने देखा कि अचानक एक बड़ा ग्लेशियर सामने से तेजी से टूटकर आ रहा है | 

उसने अपनी जान तो किसी तरह बचा ली किन्तु बेजुबान जानवरों को न बचा पाया | चरवाहे का कहना है कि उसकी आँखों के सामने 100 से अधिक भेंड बकरियां बर्फ में दबकर मर गयीं |

कुछ भेड़ बकरियों को चरवाहों ने निकालकर बचा लिया है किन्तु ग्लेशियर खिसकने से मार्ग भी बंद हो गया है जिसकी बजह से समय से सहयता नहीं पहुँच पा रही है | आपदा प्रबंधन अधिकारी, अपर जिलाधिकारी फिंचा राम चौहान ने बताया स्थानीय चरवाहे काफी हाइट मे भेड़, बकरियां चराने ले जाते है |

सूचना प्राप्त होने पर पशुपालन, राजस्व विभाग की टीम को भेजा गया है, उनके द्वारा एसडीएम को रिपोर्ट दी जाएगी। इसमें जो मानक है उसमें सम्पूर्ण क्षति का मुवावजा नहीं दिया जाता है। छोटे पशुओं मे तीस प्रतिशत ही मुवावजा दिया जाता है। डॉक्टर जो रिपोर्ट देगें उसके आधार पर उन्हें मुवावजा दिया जाएगा।

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