` लक्ष्मण झूला - योगनगरी ऋषिकेश में स्थित है एक ऐतिहासिक पुल, जानिये क्या है इतिहास ?

लक्ष्मण झूला - योगनगरी ऋषिकेश में स्थित है एक ऐतिहासिक पुल, जानिये क्या है इतिहास ?

उत्तराखंड सामान्य ज्ञान के आज के लेख में हम अपने पाठकों को उत्तराखंड में योगनगरी के नाम से प्रसिद्ध ऋषिकेश में स्थित एक ऐतिहासिक पुल के बारे में बताएँगे जिसे सबसे पहले भगवान् राम के छोटे भ्राता लक्ष्मण जी के द्वारा बनवाया गया था, जिसे लक्ष्मण झूला के नाम से जाना जाता है | यदि आप लक्ष्मण झूला पुल के बारे में सम्पूर्ण जानकारी चाहते हैं तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें |

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ऋषिकेश में स्थित खूबसूरत लक्ष्मण झूला पुल के बारे में -

गंगा नदी को पार करने के लिए नदी के ऊपर लोहे का एक झूलता हुआ पुल बनाया गया है जो ऋषिकेश की शोभा में चार चाँद लगा देता है और ऋषिकेश आये हुए पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है | इस पुल की लम्बाई 450 फीट है तथा 70 फीट की ऊँचाई पर यह पुल बीच में बिना किसी सपोर्ट के हवा में लटका हुआ है | इस पुल की सहायता से पर्यटक गंगा नदी को पैदल या दुपहिया वाहन से आसानी से पार कर सकता है | इस पुल की ख़ास बात यह है कि जब पर्यटक इस पुल को पार कर रहे होते हैं तो उन्हें आभास होता है की पुल हिल रहा है  | इस खूबसूरत पुल में खड़े होकर आप ऋषिकेश की सुन्दरता को निहार सकते हैं |


कहा जाता है कि गंगा नदी को पार करने के लिए लक्ष्मण जी ने इस स्थान पर जूट की रस्सियों का एक झूलापुल बनाया था, इसलिए उस जूट के पुल के स्थान पर सन 1939 में लोहे के बने इस पुल को लक्ष्मण झूला के नाम से जाना जाता है | इस पुल के समीप ही लक्ष्मण जी का मन्दिर तथा रखुराम मन्दिर स्थित हैं |

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लक्ष्मण झूला का इतिहास

रामायण काल में गंगा नदी को पार करने के लिए भगवान् राम के छोटे भाई लक्ष्मण जी के द्वारा ऋषिकेश में जूट की रस्सियों से झूलता हुआ एक पुल बनाया गया था | सन 1889 में कलकत्ता के एक सेठ सूरजमल झुहानूबला जी के द्वारा इस जूट के पुल को लोहे की तारों की मदद से एक मजबूत लोहे के पुल में तब्दील कर दिया गया, किन्तु सन 1924 में गंगा नदी में आई भयानक बाढ़ की बजह से यह लोहे का बना पुल क्षतिग्रस्त हो गया | उसके पश्चात सन 1939 में पुन: इस पुल का कार्य प्रारम्भ हुआ और इस बार यह पुल अत्यधिक मजबूत और आकर्षक था | पहाड़ियों के बीच बहती हुई गंगा नदी के ऊपर बना लक्ष्मण झूला वर्तमान में अति सुन्दर प्रतीत होता है | केदारखण्ड में इस पुल के नीचे इंद्रकुंड का विवरण है किन्तु आज के समय में यह इंद्रकुंड प्रत्यक्ष नहीं है |

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🔗 ऋषिकेश का इतिहास ?

 

पतित पावनी माँ गंगा की आरती का हिस्सा बनना है तो जाईये सत्रुघन घाट

यदि आप भ्रमण के लिए ऋषिकेश आये हैं या आने का प्लान बना रहे हैं तो हम अपने पाठकों को बता दें की यहाँ आकर गंगा आरती का हिस्सा अवश्य बनिए क्योंकि यहाँ प्रतिदिन होने वाली गंगा आरती का यदि आप हिस्सा बनते हैं तो आप मन की अपार शान्ति का अनुभव करेंगे | यह आरती प्रतिदिन सायं 6 बजकर 30 मिनट पर सत्रुघन घाट में सभी रीति रिवाजों के साथ सम्पन्न की जाती है | सत्रुघन घाट के अलावा गंगा आरती का हिस्सा आप ऋषिकेश में ही स्थित त्रिवेणी घाट में भी बन सकते हैं |  आप अपनी सुविधानुसार किसी भी स्थान में पहुंचकर गंगा आरती देख सकते हैं |

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उम्मीद है कि उत्तराखंड सामान्य ज्ञान का लक्ष्मण झूला से सम्बंधित यह लेख आपको पसंद आया होगा | यदि आप उत्तराखंड से सम्बंधित अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो हमसे जुड़े रहिये, हमारा प्रयास रहता है कि हम अपने पाठकों को समय समय पर उत्तराखंड से सम्बंधित अधिक से अधिक जानकारी दे सकें |

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