` उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले में पीरुल से किया जायेगा बिजली का उत्पादन

उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले में पीरुल से किया जायेगा बिजली का उत्पादन

25 लाख की लागत से तैयार किया जाएगा प्रदेश का पहला पीरुल पॉवर प्लांट

हाल में ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी ने उत्तरकाशी जिले के डुंडा ब्लाक के चकोन गाँव में 25 लाख रूपए की लागत से 25 किलोवाट क्षमता वाले राज्य के पहले पीरुल पॉवर प्लांट का उद्घाटन किया | उनके द्वारा यह शुभ कार्य दिनांक 30 सितम्बर 2020 को किया गया था, उन्होंने यह भी कहा कि जंगलों को आग से बचाने के लिए यह परियोजना काफी लाभदायक साबित होगी और प्रतिवर्ष आग लगने से होने वाले नुकसानों से बचा जा सकेगा |

 

first pirul power plant of uttarakhand

सर्वप्रथम यह जानिये कि पीरुल क्या है ?

चीड के पेंड की पत्तियां जब पेंड से गिरकर सूख जाती हैं, तब उन्हें पीरुल कहा जाता है तथा ये पत्तियां सूखने के बाद बहुत जल्द चिंगारी को आग में बदलने में सक्षम होती हैं | उत्तराखंड के 3,43,000 हेक्टयेर क्षेत्र में चीड के जंगल पाए जाते हैं, जिनसे लगभग 20-23 लाख मेट्रिक टन (उत्तराखंड सरकार के आंकड़ों के अनुसार) पीरुल प्राप्त होता है |

जनरेटर चलाने के लिए ईधन का काम कैसे करेगा पीरुल (प्रक्रिया जानिये) ?

पीरुल के उपयोग से मुख्यतः जनरेटर के लिए गैस (ईधन) तैयार की जायेगी और तब जनरेटर की मदद से तैयार बिजली को काम में लिया जाएगा | आगे के लेख में हम अपने पाठकों को पीरुल से ईधन बनाने की पूरी प्रक्रिया बताएँगे |
 

  • सर्वप्रथम पीरुल की सूखी पत्तियों को जंगल से इकट्ठा करके गैसीफायर (gasifier) प्लांट तक लाया जाएगा | इन पत्तियों को गैसीफायर प्लांट में डायरेक्ट प्रयोग में नहीं लाया जा सकता इसलिए इन पत्तियों को कॉम्पेक्ट करके उनके ब्रिकेट (briquettes) बनाये जाते हैं |

NOTE - किसी भी आर्गेनिक पदार्थ को जलाने से पहले उनके ब्रिकेट्स बनाये जाते हैं ताकि वह पदार्थ ठीक तरीके से जल सके |

  • पत्तियों के ब्रिकेट्स बन जाने के बाद इन ब्रिकेट्स को ही गैसीफायर प्लांट में जलाया जाएगा |
  • ब्रिकेटों को जलाने के लिए 800 डिग्री सेंटीग्रेट तथा इससे अधिक तापमान का प्रयोग आवश्यक है |
  • ब्रिकेट्स जलने के बाद प्रोड्यूसर गैस (producer gas) बनायेंगे, इस प्रोड्यूसर गैस में कार्बन मोनो ऑक्साइड, हाइड्रोजन तथा मीथेन पायी जाती है |
  • प्रोड्यूसर गैस को ठंडा करके इसे फ़िल्टर किया जायेगा तथा जनरेटर में ईधन के रूप में प्रयोग किया जाएगा |


पीरुल पॉवर प्लांट में लोगों को मिलेगा रोजगार

अवनी बायो एनर्जी (प्राइवेट संस्था) की कई सालों की मेहनत के बाद इस कम्पनी ने पीरुल से बिजली उत्पादित करने में सफलता प्राप्त की है |  उत्तराखंड सरकार अब अवनी बायो एनर्जी को आधार बनाकर  इस तरह के कई पॉवर प्लांट स्थापित करने का प्रयास कर रही है | प्रदेश भर में प्लांटों को स्थापित करने का यह जिम्मा उत्तराखंड सरकार ने Uttarakhand Renewable Energy Devlopment Agency (UREDA) को सौंप दिया है | जैसे जैसे इन प्लांटों को स्थापित किया जाएगा वैसे-वैसे उत्तराखंड में लोगों के रोजगार की समस्या समाप्त होने लगेगी |

यह भी जानिये :

 🔗 उत्तराखंड में कचरे से किया जाएगा 5 मेगावाटतक का बिजली उत्पादन 

🔗 उत्तराखंड के ऋषिकेश पर बनाया जाएगा भारत का पहला ग्लास फ्लोर ब्रिज 

🔗 उत्तरकाशी में बनाया जा रहा है भारत का पहला हिम तेंदुआ संरक्षण केंद्र 

🔗 मुनस्यारी में स्थापित किया गया भारत का पहला लाइकेन पार्क

उम्मीद करते हैं कि उत्तराखंड सामान्य ज्ञान का पीरुल पॉवर प्लांट से सम्बंधित यह लेख आपको पसंद आया होगा | हमारा प्रयास रहता है कि हम अपने पाठकों तक उत्तराखंड से सम्बंधित अधिक से अधिक जानकारी पहुँचा सकें | यदि आप भी उत्तराखंड के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो हमारे लेखों को पढ़ते रहिये |
 

धन्यवाद

टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां