` पंचकेदार में से एक केदार ( रुद्रनाथ ) जहाँ भगवान् शिव के मुख की होती है पूजा

पंचकेदार में से एक केदार ( रुद्रनाथ ) जहाँ भगवान् शिव के मुख की होती है पूजा

उत्तराखंड सामान्य ज्ञान के आज के लेख में हम अपने पाठकों को एक ऐसे दिव्य मन्दिर के बारे में जानकारी देने वाले हैं जहाँ पर भगवान शिव के  शिवलिंग की पूजा ना होकर उनके रौद्र मुख की पूजा होती है, इस दिव्य स्थान को रुद्रनाथ मन्दिर के नाम से जाना जाता है, तथा उनके बाकी शरीर की पूजा पडोसी देश नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थित पशुपतिनाथ मन्दिर में की जाती है | यदि आप रुद्रनाथ मन्दिर के बारे में विस्तार में जानना चाहते हैं तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें |

rudranath temple

Rudranath Temple Chamoli

जैसा कि आपको पता ही होगा कि उत्तराखंड में स्थित भगवान् शिव के पाँच मुख्य मंदिरों को पंचकेदार कहा जाता है, रुद्रनाथ मन्दिर भी उन्ही पंचकेदारों में से एक केदार है | जो कि उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में समुद्रतल से 3600 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है और प्राकृतिक सुन्दरता से परिपूर्ण है | इस मन्दिर में भगवान् शिव के मुख की पूजा की जाती है | जैसा कि सभी जानते हैं कि भगवान् शिव के अन्य मंदिरों में शिवलिंग की पूजा की जाती है और सायद यह एकमात्र मन्दिर ऐसा है जहाँ पर शिवलिंग की पूजा न करके उनके मुख की पूजा होती है, जो कि इस मन्दिर की ख़ास पहचान है |

rudranath temple chamoli

 रुद्रनाथ मन्दिर का पैदल रास्ता अत्यधिक जटिल होने के कारण इस मन्दिर तक पहुँचना बहुत कठिन है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति भगवान् शिव के मुख को देखने में सक्षम नहीं हो पाता है | शरद ऋतु में भारी बर्फवारी होने के कारण यहाँ पहुँचना नामुमकिन होता है इसलिए रुद्रनाथ मन्दिर के कपाट को बंद कर दिए जाते है और कपाट खुलने तक भगवान् शिव के मुख की पूजा गोपेश्वर में स्थित गोपीनाथ मन्दिर में की जाती है | आप गोपीनाथ मन्दिर जाकर भी भगवान् शिव के रौद्र मुख के दर्शन तथा पूजा अर्चना कर सकते हैं |

रुद्रनाथ मन्दिर से जुडी पौराणिक कथाएं एवं मान्यताएं

रुद्रनाथ मन्दिर को लेकर यह कथा प्रचलित है कि इस मन्दिर का निर्माण पांडवों के द्वारा तब किया गया था जब वे भगवान शिव को क्षमा प्राप्ति के लिए खोज रहे थे | भगवान् शिव महाभारत काल में हुए विनाश का कारण पांडवों को मानते थे और उनसे नाराज हो गए थे, इसलिए पाण्डव भी उनसे क्षमा मांगना चाहते थे किन्तु भगवान् शिव पांडवों से मिलना नहीं चाहते थे और दूर जाकर कहीं छिप गए थे | अंत में भगवान् शिव ने उन्हें यहाँ पर दर्शन दिए और क्षमा कर दिया | पांडवों ने प्रसन्न होकर उसी स्थान पर भगवान् शिव का एक मन्दिर बनाया और वहाँ उनकी पूजा प्रारम्भ कर दी | रुद्रनाथ मन्दिर परिसर में ही पांडवों के छोटे- छोटे प्राचीन मन्दिर भी बने हुए हैं |

rudranath mandir

How to Reach Rudranath Temple

सड़कमार्ग द्वारा

भगवान शिव को समर्पित रुद्रनाथ मन्दिर गोपेश्वर-केदारनाथ मार्ग पर स्थित है जहाँ जाने के लिए आपको सर्वप्रथम ऋषिकेश पहुँचना होगा | ऋषिकेश पहुँचने के बाद आपको सगर गाँव जाना होगा, जिसके बीच की दूरी लगभग 219 किलोमीटर है | सगर गाँव से रुद्रनाथ के लिए लगभग 20 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी होती है | यह पैदल यात्रा अपने जटिल मार्गों की बजह से अविश्वसनीय भी हो सकती है |

हवाई मार्ग द्वारा

रुद्रनाथ मन्दिर जाने के लिए निकटतम हावाई अड्डा जौलीग्रांट हवाई अड्डा है जो कि देहरादून में स्थित है | इस हवाई अड्डे की गोपेश्वर से दूरी लगभग 250 किलोमीटर है, यहाँ से आप आगे जाने के लिए टैक्सी तथा स्थानीय बसों का प्रयोग भी कर सकते हैं |

रेलमार्ग द्वारा

यदि आप रेलमार्ग द्वारा सफ़र कर रहे हैं और रुद्रनाथ मन्दिर जाना चाहते हैं तो आप देहरादून, ऋषिकेश तथा हरिद्वार अपनी सुविधानुसार किसी भी रेलवे स्टेशन का प्रयोग कर सकते हैं | गोपेश्वर के सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है, जिसकी दूरी लगभग 240 किलोमीटर है | ऋषिकेश के बाद गोपेश्वर जाने के लिए आप टैक्सी या फिर स्थानीय बसों का प्रयोग कर सकते हैं |

उम्मीद करते हैं कि उत्तराखंड सामान्य ज्ञान का रुद्रनाथ मन्दिर, चमोली से सम्बंधित यह लेख आपको पसंद आया होगा, यदि आप उत्तराखंड के प्राचीन मंदिरों, यहाँ के ख़ूबसूरत पर्यटन स्थलों तथा उत्तराखंड से सम्बंधित अधिक से अधिक जानकारी पाने की इच्छा रखते हैं तो उत्तराखंड सामान्य ज्ञान से जुड़े रहिये |
धन्यवाद

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