` आदिबद्री मन्दिर चमोली - सोलह (16) प्राचीन मंदिरों का समूह है उत्तराखंड में स्थित आदिबद्री

आदिबद्री मन्दिर चमोली - सोलह (16) प्राचीन मंदिरों का समूह है उत्तराखंड में स्थित आदिबद्री

प्राचीन मन्दिर समूह आदिबद्री

आदिबद्री मन्दिर प्राचीन मंदिरों का एक विशाल समूह है, जिसे 16 प्राचीन मंदिरों का समूह के नाम से जाना जाता है | यहाँ प्राचीन में 16 प्राचीन मन्दिर हुआ करते थे,किन्तु वर्तमान में 14 ही शेष हैं और उनके स्थापत्य शैली के आधार पर उनकी आयु 8 वीं सताब्दी से 12 वीं सताब्दी तक आँकी जा सकती है | 16 मंदिरों के इस समूह में मुख्य मन्दिर भगवान् विष्णु जी को समर्पित है, तथा अन्य गौण मन्दिर श्री लक्ष्मीनारायण, अन्नपूर्णा, सूर्य, सत्यनारायण, गणेश जी, ब्रह्मा, शिव, गरुण, दुर्गा तथा जानकी आदि को समर्पित हैं |आदिबद्री उत्तराखंड के पंच बद्रियों में से एक बद्री है तथा अत्यधिक पावन धाम है, और इसे आदिबद्रि धाम के नाम से भी जाना जाता है |

adi badri temple in chamoli

इस मन्दिर को प्राचीन में नारायण मठ के नाम से जाना जाता था, तथा मन्दिर की मान्यता है कि यह मन्दिर भगवान् नारायण की तपस्थली है | यहाँ पर सर्वप्रथम आदिगुरू शंकराचार्य जी आये थे तभी से इस नारायण मठ को आदिबद्री के नाम से जाना जाने लगा | आदिबद्री मन्दिर समूह से 16 किलोमीटर की दूरी पर कर्णप्रयाग स्थित है जो कि उत्तराखंड के पंच प्रयाग में से एक प्रयाग है |

आदिबद्री के मुख्य मन्दिर में भगवान विष्णु जी की 3 फुट ऊँची मूर्ती की पूजा की जाती है, तथा इस पूजा अर्चना को थापली गाँव में रहने वाले "थपलियाल परिवार" के पुजारियों के द्वारा सम्पन्न किया जाता है | थपलियाल परिवार ही 5-6 पीढ़ियों से आदिबद्री मन्दिर समूह की देखरेख तथा पूजा अर्चना का जिम्मा उठाये हुए हैं |

कब हुआ था आदिबद्री मन्दिर समूह का निर्माण ?

मन्दिर के निर्माण को लेकर कई किवदंतियां प्रचलित हैं, कहा जाता है कि इन प्राचीन मंदिरों का निर्माण पाण्डवों के द्वारा तब करवाया गया था जब वे स्वर्ग की ओर प्रस्थान कर रहे थे ,  एवं यह भी कहा जाता है  कि इस मन्दिर का निर्माण 8 वीं सताब्दी में आदिगुरू शंकराचार्य जी के द्वारा करवाया गया था | जबकि भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग के अनुसार यह पाया गया कि इस मन्दिर समूह का निर्माण 8 वीं से 11 वीं सताब्दी के बीच कत्यूरी राजाओं के द्वारा किया गया था |

adi badri karnprayag

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के द्वारा आदिबद्री को किया गया है संरक्षित

आदिबद्री को प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम 1958 (1958 के 24) के अन्तर्गत रास्ट्रीय महत्त्व घोषित किया गया है, यदि कोई भी व्यक्ति इस संरक्षित स्मारक को क्षति पहुंचता, नष्ट करता, परिवर्तित करता, खतरे में डालता या दुरूपयोग करते हुए पाया जाता है, तो इस अपकृत्य के लिए प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल एवं अवशेष अधिनियम 2010 के अन्तर्गत दो (2) वर्ष का कारावास या एक लाख तक का जुर्माना अथवा दोनों से दण्डित किया जा सकता है |

adi badri mandir

उम्मीद करते हैं कि उत्तराखंड सामान्य ज्ञान का  आदिबद्री मन्दिर चमोली से सम्बंधित यह लेख आपको पसंद आया होगा | यदि आप चाहते हैं कि उत्तराखंड के संरक्षित क्षेत्रों के बारे में अधिक लोगो को पता चले तो इस लेख को अधिक से अधिक शेयर करें | हमारा प्रयास रहता है कि हम अपने पाठकों के लिए उत्तराखंड से सम्बंधित अधिक से अधिक जानकारी इकट्ठा कर पायें और समय समय पर उन तक पहुँचा पायें |


उत्तराखंड सामान्य ज्ञान से जुड़ने के लिए धन्यवाद !

टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां