` Kedarnath Yatra - हिंदी में जानिये सम्पूर्ण जानकारी

Kedarnath Yatra - हिंदी में जानिये सम्पूर्ण जानकारी

केदारनाथ यात्रा हिन्दू धर्म की पवित्र धार्मिक यात्रा है, तथा इस यात्रा के दौरान दर्शनार्थियों का मुख्य लक्ष्य भगवान् शिव को समर्पित केदारनाथ मन्दिर पहुंचकर भगवान् शिव के दर्शन करना होता है | सही मायने में देखा जाए तो यह यात्रा अत्यधिक कठिन है, क्योंकि इस मन्दिर तक पहुँचने के लिए 18 किलोमीटर पर्वतीय मार्गों पर पैदल चलकर पहुँचना होता है, तथा इसके टेढ़े-मेढ़े रास्ते इस यात्रा को अत्यधिक कठिन बनाते है | किन्तु कहा जाता है कि यदि कोई श्रद्धालु सच्चे मन से भगवान् शिव के दर्शन के लिए आता है तो उस पर भगवान् शिव का आशीर्वाद रहता है, और वह यहाँ की कठिन से कठिन चढ़ाई को भी हँसते हँसते चढ़कर Kedarnath Temple (केदारनाथ मन्दिर) पहुँच जाता है |


Kedarnath Temple (केदारनाथ मन्दिर)

केदारनाथ मन्दिर उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है तथा भगवान् शिव का यह मन्दिर Kedarnath Dham (केदारनाथ धाम) के नाम से विश्व विख्यात है, और उत्तराखंड का सबसे विशाल शिव मन्दिर है | केदारनाथ धाम तीन ओर से ऊँची-ऊँची पहाड़ियों से घिरा हुआ है, जिसमे से एक ओर से लगभग 22 हजार फुट ऊँचा केदारनाथ पर्वत, दूसरी ओर से 21 हजार 600 फुट ऊँचा खर्च कुण्ड पर्वत तथा तीसरी ओर से 22 हजार 700 फुट ऊँचा भरतकुण्ड पर्वत केदारनाथ मन्दिर की सोभा को बढ़ाते हैं तथा इस मन्दिर की रक्षा करते हैं |

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केदारनाथ मन्दिर बारह जियोतिर्लिंगों में सम्मिलित होने के साथ-साथ चारधामों में से एक धाम तथा उत्तराखंड के पंचकेदारों में से एक केदार है | यह मन्दिर लगभग 6 फुट ऊँचे चबूतरे पर कटवाँ पत्थरों के भूरे रंग के विशाल शिलाखंडों को जोड़कर बनाया गया है, तथा यह मन्दिर इन शिलाखंडों की बजह से बहुत खूबसूरत प्रतीत होता है | केदारनाथ मन्दिर का गर्भगृह 8 वी सताब्दी का माना जाता है |

केदारनाथ मन्दिर की ऊँचाई 85 फुट, लम्बाई 187 फुट तथा मन्दिर की दीवारों पर लगे शिलाखंडों की मोटाई 12 फुट है | प्राचीनकाल में बनाया गया केदारघाटी की सोभा बढ़ाने वाला केदारनाथ मन्दिर वास्तुकला का एक नायाब रूप है, जो किसी को भी आश्चर्यचकित कर सकता है |

Kedarnath Trek (केदारनाथ ट्रैक)

धार्मिक आस्था का केन्द्र केदारनाथ मन्दिर पहुँचने के लिए एक कठिन रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है, किन्तु साहसिक गतिविधियाँ करते रहने वालों के लिए केदारनाथ का यह ट्रैक अत्यधिक रोमांचकारी भी होता है | इस ट्रैक में केदारनाथ धाम पहुँचने के लिए लगभग 18 किलोमीटर का पैदल सफ़र करना होता है | यदि आप बुजुर्ग हैं या फिर पैदल चलने में असमर्थ है तो आप खच्चर में बैठकर भी जा सकते हैं | केदारनाथ मन्दिर के लिए पैदल यात्रा गौरीकुण्ड से प्रारम्भ होती है तथा यह इस यात्रा का मुख्य पड़ाव है, यहाँ पर गर्म पानी का एक कुण्ड है जिसमे दर्शनार्थी स्नान करते हैं तथा अपनी यात्रा को प्रारम्भ करते हैं |

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सर्वप्रथम गौरीकुण्ड से आपको रामबाड़ा पुल पहुँचना होता है जिसकी दूरी लगभग 4 किलोमीटर है | रामबाड़ा पहुँचकर प्राकृतिक वादियों तथा नदी के सौन्दर्य के बीच आप विश्राम कर सकते हैं, क्योंकि रामबाड़ा के आगे की चढ़ाई अत्यधिक कठिन है |

रामबाड़ा पुल से लगभग 3 किलोमीटर दूर जंगल चट्टी है, तथा यहाँ से लगभग 5 किलोमीटर दूर आपको भीमवली पहुँचना होता है, यहाँ पहुँचने के बाद आप विश्राम के साथ- साथ नास्ता - पानी का लुफ्त उठा सकते हैं |

भीमवली में विश्राम करने के बाद लगभग 2 किलोमीटर दूर लिंचोली है, जहाँ पर उत्तराखंड सरकार द्वारा पर्यटकों के लिए कई विश्रामगृह  बनाये गए हैं | यदि आप आगे का सफ़र उसी दिन ना करके अगले दिन करना चाहते हैं तो आप यहाँ पर ठहर सकते हैं | लिंचोली से केदारनाथ मन्दिर की दूरी लगभग चार किलोमीटर है | इस सम्पूर्ण ट्रैक में आप प्राकृतिक वादियों, वर्फ से जमी नदियाँ तथा झरने और ख़ूबसूरत फूलों को देख सकते हैं |

Kedarnath trek route map from Gaurikund

गौरीकुण्ड - रामबाड़ा पुल - जंगल चट्टी - भीमवली - लिंचोली - केदारनाथ बेस कैंप - केदारनाथ मन्दिर 

 

Kedarnath Yatra By Helicopter / केदारनाथ के लिए हवाई यात्रा 

 Kedarnath Uttarakhand  (केदारनाथ उत्तराखंड) भारत देश का गौरव है जहाँ पर भगवान् शिव के दर्शन करने के लिए देशी तथा विदेशी भक्त प्रतिवर्ष लाखों की मात्रा में पहुँचते हैं | वैसे तो यहाँ जाने के लिए सभी भक्तगढ़ पैदल मार्ग को ही चुनते हैं किन्तु यदि किसी कारणवश भोले के भक्त पैदल जाने में असमर्थ होते हैं तो उन्हें भी निराश होने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि केदारनाथ यात्रा के लिए हेलीकाप्टर की व्यवस्था भी है, जिनकी मदद से मन्दिर तक आसानी से पहुँचा जा सकता है |

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यदि आप केदारनाथ मन्दिर का सफ़र हवाई यात्रा द्वारा करना चाहते हैं तो उसके लिए आपको सोनप्रयाग,फाटा, मैखंडा तथा गुप्तकाशी से हेलीकाप्टर की सर्विस लेनी होगी, तथा इसके लिए आपको यात्रा के पहले से ही ऑनलाइन बुकिंग कराकर अपनी सीट सुनिश्चित करवानी होगी | इस हवाई यात्रा के लिए आपको लगभग 5000 रूपए प्रति व्यक्ति (राउंड ट्रिप) तक का भुगतान करना पड़ सकता है |

वर्तमान समय में आठ हेली कंपनियों के हेलीकाप्टर केदार घाटी में केदारनाथ मन्दिर के लिए प्रतिदिन उड़ान भर रहे हैं, जिसकी बजह से पर्यटकों में काफी उत्साह भी देखने को मिल रहा है | केदारनाथ मन्दिर के लिए यह सेवा अब कपाट बन्द होने तक जारी रहेगी |

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How to reach Kedarnath / केदारनाथ मन्दिर कैसे पहुंचें ?

 Route - 1 

दिल्ली -हरिद्वार - ऋषिकेश - देवप्रयाग - श्रीनगर - रुद्रप्रयाग - अगस्तमुनी - कुण्ड - गुप्तकाशी - फाटा - रामपुर - सोनप्रयाग - गौरीकुण्ड - केदारनाथ 

Route - 2

हल्द्वानी - भीमताल - भवाली - रानीखेत - द्वाराहाट - आदिबद्री - गैरसैण - रुद्रप्रयाग - अगस्तमुनी - कुण्ड - गुप्तकाशी - फाटा - रामपुर - सोनप्रयाग - गौरीकुण्ड - केदारनाथ 

 केदारनाथ आने के लिए आप कोई भी रास्ता चुने आपका मुख्य उद्देश्य होना चाहिए कि सर्वप्रथम आप रुद्रप्रयाग पहुंचे, क्योंकि रुद्रप्रयाग के बाद केदारनाथ जाने के लिए बस एक ही रास्ता है जो आपको केदारनाथ मन्दिर तक पहुंचाएगा |

उम्मीद करते हैं कि Kedarnaath Yatra से सम्बंधित सभी जानकारी जो आपके लिए लाभकारी होगी "उत्तराखंड सामान्य ज्ञान" के इस लेख के द्वारा आप तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है | ऐसी ही रोचक तथा काम आने वाली जानकारी समय समय पर पाने के लिए हमसे जुड़े रहिये |

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