` Dobra Chanthi Bridge – उत्तराखंड की टिहरी झील पर बना भारत का सबसे लम्बा सस्पेंसन व्रिज

Dobra Chanthi Bridge – उत्तराखंड की टिहरी झील पर बना भारत का सबसे लम्बा सस्पेंसन व्रिज

 डोबरा-चांठी पुल

उत्तराखंड की टिहरी झील पहले से ही विश्व प्रसिद्ध है, क्योंकि इस झील में विश्व का पाँचवा सबसे ऊँचा तथा भारत का सबसे ऊँचा बाँध बना हुआ है, इसलिए यह एक पर्यटन स्थल भी है | इस पर्यटन स्थल में भारत का सबसे लम्बा सस्पेंसन ब्रिज भी बनकर तैयार हो गया है, जिसने टिहरी झील की सुन्दरता को और बढ़ा दिया है | यह पुल 440 मीटर लम्बा है, जो डोबरा और चांठी नामक स्थानों को आपस में जोड़ता है |

dobra chanthi bridge uttarakhand

 

दक्षिणी कोरिया की टेक्नोलॉजी की मदद से लगभग 150 करोड़ रूपए की लागत से यह सस्पेंसन ब्रिज बनाया गया है | इस सस्पेंशन ब्रिज का काम दक्षिणी कोरिया की कंसलटेंसी के सुपरविजन में प्रारम्भ किया गया था |  इस परियोजना के लिए नाबार्ड से कुल 7497.28 लाख रूपए का ऋण लिया गया था | वैसे तो इस प्रोजेक्ट को 2006 में स्वीकृति मिल गयी थी, किन्तु कई कारणों की बजह से इसमें बिलम्ब हुआ और अंत में 14 वर्षों के बाद 40 गाँव की 45 हजार आवादी को इसे प्रारम्भ करके एक तोहफा दिया गया |

2006 में मिली  स्वीकृति के बाद  इस पुल का कार्य 12 फरबरी 2016 को प्रारम्भ किया गया था, और इस कार्य की समाप्ति की संभावित तिथि 31 फरबरी 2018 तय की गयी थी | किन्तु कई कारण ऐसे रहे जिनकी बजह से यह पुल अपनी निर्धारित समय तिथि पर तैयार नहीं हो पाया |

कितना सुरक्षित है टिहरी झील में बना डोबरा- चांठी पुल ?

जैसे कि आप जानते ही होंगे की पहाड़ों पर चलने वाली हवाओं की गति काफी तीव्र होती है, और किसी भी पुल में उस हवा का अत्यधिक प्रभाव पड़ता है | डोबरा- चांठी पुल में हवा के दबाव को कंट्रोल करने के लिए wind ferry का प्रयोग किया गया है | इनका डिजाईन ऐसा बनाया जाता है, कि ये तेज हवा के झोंके को आसानी से काट पायें |

इस पुल पर कार्य कर रहे इंजीनियरों ने बताया है कि इस पुल की उम्र लगभग 100 साल है, और यदि इस पुल का रख-रखाव ठीक रहा तो इस पुल की उम्र 100 वर्षों से भी ज्यादा होगी | इसलिए विशेषज्ञों की बात को ध्यान में रखते हुए यह कहना उचित होगा कि लगभग 100 वर्षों तक टिहरी झील में बना डोबरा-चांठी पुल बिल्कुल सुरक्षित है |

 dobra chanthi suspension bridge

IIT Roorkee द्वारा तैयार किया गया है डोबरा-चांठी पुल का डिजाईन

जैसा कि सभी जानते हैं की भारत देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, यहाँ पर हर क्षेत्र में लाखों कुशल और प्रतिभाशील नागरिक निवाश करते हैं | अपनी प्रतिभा को दिखाते हुए IIT Roorkee द्वारा पुल का ऐसा डिजाईन तैयार किया गया है, जिसने दुनिया भर के इंजीनियरों को आश्चर्यचकित कर दिया है | आई आई टी रूडकी ने जिस पुल का डिजाईन तैयार किया है वह भारत का सबसे लम्बा सस्पेंसन ब्रिज होगा |

वैसे तो आई आई टी खड़गपुर ने आई आई टी रूडकी द्वारा तैयार किये गए डिजाईन को सहमती नहीं दी थी, क्योंकि उनके अनुसार इस पुल को बनाने में काफी चुनौतियाँ थीं | किन्तु जब चुनौतियों का सामना करते हुए निर्माण कार्य पूरा हुआ तो आई आई टी खड़गपुर ने भी उनके कार्य की सराहना की |    

डोबरा चांठी पुल को बनाने में चंडीगढ़ की एक कम्पनी P & R Infraprojects Limited का महत्वपूर्ण योगदान रहा | यह कम्पनी स्टेडियम, फ्लाईओवर इत्यादि बड़े बड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने में माहिर है |

डोबरा-चांठी पुल को बनने में क्यों लगे 14 वर्ष ?

डोबरा चांठी पुल के प्रोजेक्ट डायरेक्टर Mr. R S Yadav जी ने बताया कि इस पुल के निर्माण में कई प्रकार की रुकावटें आयीं, जिसकी बजह से यह पुल तय की गयी समय सीमा से काफी वर्षों के बाद तैयार हुआ | सर्वप्रथम इस प्रोजेक्ट के लिए डिजाईन के अनुसार एक धनराशी को मंजूरी मिली थी, किन्तु भूमि खुदाई के समय पता लगा कि इसका डिजाईन पुन: तैयार करना पड़ेगा, और डिजाईन को फिर से तैयार किया गया, जिसमे अब अधिक धनराशी की आवश्यकता थी | इस धनराशी को मंजूरी मिलने में काफी समय लग गया, किन्तु अंत में इस परियोजना में जितनी धनराशी की आवश्यकता थी, सरकार द्वारा उतनी धनराशी को मंजूरी दे दी गयी |

इस मंजूरी के बाद पुल का कार्य पुन: प्रारम्भ हो गया, इस प्रोजेक्ट में पुल में सस्पैन्डर्स प्रयोग किये जा रहे थे, जो कि रांची से सप्लाई किये गए थे | रांची से सप्लाई किये गए  सस्पैन्डर्स की सौकेटिंग फ़ैल हो गयी, और सौकेटिंग के फेल होने की बजह से एक बहुत बड़ी दुर्घटना हुई जिसमे किसी भी प्रकार का नुकसान तो नहीं हुआ, किन्तु इस प्रोजेक्ट को रोक दिया गया |

दुर्घटना के बाद हायर किये गए इंटरनेशनल कन्सट्रक्टर इंजीनियर पीछे हट गए और उन्होंने इस पुल की जिम्मेदारी लेने से माना कर दिया | इस दुर्घटना के बाद इस पुल पर कार्य करना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया, किन्तु भारतीय इंजीनियर पीछे नहीं हटे, और इस पुल की पूरी जिम्मेदारी लेकर इसके कार्य को फिर से प्रारम्भ किया |

इस दुर्घटना के बाद सभी लगे हुए सस्पैन्डरों को फिर से उतारना पड़ा, ताकि भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं के लिए सावधानी वर्ती जा सके | सभी सस्पैन्डरों की सौकेटिंग काटनी पड़ी और उन सभी को रि- सॉकेट करना पड़ा, जिसमे काफी समय लग गया | 2019 मई अंत में इस पुल का कार्य फिर से जोरो से प्रारम्भ किया गया, और अब यह पुल बनकर तैयार है तथा इसमें वाहनों की आवाजाही भी प्रारम्भ कर दी गयी है |   

कौन- कौन से वाहन चल पायेंगे डोबरा-चांठी पुल पर ?

इस पुल पर छोटे वाहनों के लिए किसी भी प्रकार की लिमिटेशन नहीं है, एक समय में कितने भी छोटे वाहन एक साथ इधर-उधर की दूरी तय कर सकते हैं | किन्तु यदि बड़ा वाहन इस पुल को पार कर रहा है, तो दूसरी ओर से बड़ा वाहन प्रतिबंधित होगा, किन्तु छोटा वाहन उस पुल को पार कर सकेगा | दोनों ओर से बड़े वाहन एक समय में पुल को पार नहीं कर पायेंगे |

इस आवाजाही को कन्ट्रोल करने के लिए पुल के दोनों ओर चौकियां बनायीं गयी हैं, जिनमे बैठे कर्मचारी हमेशा एक दूसरे के सम्पर्क में रहेंगे और वहां के वाहनों को कंट्रोल करेंगे |

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