` पवित्रता का प्रतीक उत्तराखंड का ब्रह्म कमल

पवित्रता का प्रतीक उत्तराखंड का ब्रह्म कमल

 उत्तराखंड का राज्य पुष्प भ्रह्म कमल

उत्तराखंड का राज्य पुष्प ब्रह्म कमल जिसे पवित्रता का प्रतीक माना जाता है, पुष्प की बहुत दुर्लभ प्रजाति है | यह पुष्प हिमालयी क्षेत्रों में 3000 से 5000 मीटर की ऊँचाई पर पाया जाने वाला एक विशेष प्रकार का फूल है, जिसे भोलेनाथ जी के चरणों में चढ़ाया जाता है | यह पुष्प पानी तथा कीचड में ना होकर भूमि में खिलता है |

पवित्रता का प्रतीक उत्तराखंड का  ब्रह्म कमल

राजकीय पुष्प  ब्रह्म कमल का वैज्ञानिक नाम सोसूरिया अबवेलटा है | सम्पूर्ण भारत में इस पुष्प की लगभग 61 प्रजातियाँ पायी जाती हैं, जिनमे से 24 प्रजातियाँ तो उत्तराखंड में ही पायी जाती हैं | ब्रह्म कमल को महाभारत में सौगंधिक पुष्प कहा गया है, तथा यह पुष्प उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित फूलों की घाटी में बहुतायत मात्रा में पाया जाता है |

उत्तराखंड राज्य में यह पवित्र पुष्प पिण्डारी, छिपला, रूपकुंड, हेमकुण्ड, केदारनाथ तथा फूलों की घाटी इत्यादि ऊँचे क्षेत्रों में देखने को मिलता है | भारत के अन्य भागों में इसे अलग अलग नाम से जाना जाता है, जैसे हिमाचल में इसे दूधाफूल, उत्तर पश्चिमी भारत में इस पुष्प को बरगनडटोगेस  तथा कश्मीर में गलगल नाम से जाना जाता है |

ब्रह्म कमल के औषधीय गुणों के कारण इस पुष्प को किया गया है संरक्षित  

औषधीय गुणों से परिपूर्ण सुन्दर  ब्रह्म कमल को उत्तराखंड में संरक्षित किया जा रहा है | चमोली जिले के रुद्रनाथ में तीन हेक्टेयर वन भूमि पर फूलों का बैंक बनाया जा रहा है, जिसमे 15 प्रकार के फूलों को संरक्षित किया जाएगा, रुद्रनाथ स्थित फूलों के इस बैंक में उत्तराखंड के राज्य पुष्प  ब्रह्म कमल को भी संरक्षित किया जा रहा है |

उत्तराखंड के राजकीय पुष्प में निम्न औषधीय गुण पाए जाते हैं –

  1. कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को कंट्रोल करने के लिए  ब्रह्म कमल को उपयोग में लाया जाता है |  
  2. जले-कटे में इस पुष्प का प्रयोग काफी लाभदायक होता है, क्योंकि इस पुष्प के राइजोम में एंटीसैप्टिक  पाया जाता है,जो जले कटे को ठीक करने में सहायक होता है | 
  3. सर्दी- जुखाम, हड्डियों के दर्द इत्यादि में भी इस पुष्प का इस्तेमाल किया जाता है | 
  4. ब्रह्म कमल के पुष्प के तेल से सर की मालिश करने पर मिर्गी के दौरे से राहत तथा मानसिक विकार से छुटकारा मिलता है |
  5. इस पुष्प की खुसबू तीव्र होती है, इसलिए अधिक ऊँचाई पर निवास करने वाले भोटिया जनजाति के लोग इस पुष्प को अपने घरों में रखते हैं, जिससे इसकी खुशबू घर में फैली रहे, और वे लोग छोटी मोटी बीमारियों से दूर रह सकें |

पुराणों में भी मिलता है  ब्रह्म कमल का उल्लेख

महाभारत काल में  ब्रह्म कमल को सौन्धगिक पुष्प कहा गया है, और पौराणिक काल में कई ऐसे दिव्य चरित्र हैं, जिनका सम्बन्ध  ब्रह्म कमल के साथ है |

किवदंती है कि, एक बार जब भगवान् विष्णु हिमालय क्षेत्र पहुँचे तो उन्होंने भगवान् शिव को 1008  ब्रह्म कमल अर्पित किये, किन्तु शिव जी को चढ़ाए गए ब्रह्म कमलों में से एक पुष्प कम हो गया | ऐसी स्थिति में एक पुष्प की कमी को पूरा करने के लिए भगवान् विष्णु जी ने अपनी एक आँख पुष्प के रूप में भोलेनाथ जी को समर्पित कर दी | तभी से भोलेनाथ का एक नाम कमलेश्वर तथा विष्णु जी का एक नाम कमल नयन पड़ा |

एक किवदंती के अनुसार  ब्रह्म कमल की वजह से भीम का घमंड चूर-चूर हो गया था | कहा जाता है कि जब पांडव और द्रौपदी वनवास पर थे, तब द्रौपदी ने  ब्रह्म कमलको खिलते हुए देखा, और वे मनमोहित हो गयीं, और उस  ब्रह्म कमलको लाने की जिद्द करने लगीं | द्रौपदी की जिद्द के सामने झुककर भीम ने पुष्प को लाने का निर्णय लिया, और बद्रिकाश्रम की तरफ जाने लगे | बद्रीनाथ से कुछ ही दूरी पर हनुमान चट्टी में हनुमान जी ने भीम का रास्ता रोक लिया | हनुमान जी ने अपनी पूंछ को रास्ते में फैला दिया और भीम से बोले यदि तुम इसको उठाने में सफल होगे तब ही तुम आगे जा सकते हो | बहुत कोशिश करने के बाद भी भीम हनुमान जी की पूंछ को हिला भी ना सके | हार मानकर भीम ने हनुमान जी से आग्रह किया और पुष्प को ले जाने की विनती करी | हनुमान जी के रास्ता छोड़ने के बाद ही भीम ब्रह्म कमल लाने में सक्षम हो पाए और पुष्प को ले जाकर द्रौपदी की इच्छा को पूरा किया |

खतरे में है  ब्रह्म कमल का अस्तित्व, जानिये क्यों ?

जैसा कि आप जानते ही हैं कि  ब्रह्म कमल एक पवित्र पुष्प है, जिसे भोलेनाथ जी के चरणों में चढ़ाया जाता है | यह पुष्प की एक दुर्लभ प्रजाति है, और बहुत ऊँचे स्थानों पर पायी जाती है, किन्तु फिर भी इसे तोडा जा रहा है | दरअसल यह पुष्प भगवान शिव को अर्पित किया जाता है और शुभ माना जाता है, जिसके लिए स्थानीय लोग इस पुष्प को बहुत अधिक मात्रा में तोड़कर लाते हैं, और दर्शनार्थियों को 20- 25 रूपए में बेचते हैं, जिससे दर्शनार्थी भोलेनाथ जी की पूजा को सम्पन्न कर सकें | यही कारण है कि  ब्रह्म कमल के अस्तित्व में ना रहने का खतरा दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है |

आशा करते हैं कि उत्तराखंड सामान्य ज्ञान की “पवित्रता का प्रतीक उत्तराखंड का  ब्रह्म कमल” से सम्बन्धित यह पोस्ट आपको पसंद आई होगी | अधिक से अधिक लोग उत्तराखंड के राज्य पुष्प के बारे में जान सकें, इसके लिए इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें |

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2 टिप्पणियां

  1. Name suni thi aaj dekhne ki mil gyi. thanks for share but share more photos about this with large size images.

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    1. mai koshis karunga ki jald se jald high quality photo upload kar saku... aap instagram and facebook account se judkar bhi uttarakhand ki sunadr tasveeren dekh sakte hain .

      हटाएं

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