` Rivers in Uttarakhand is so Famous, But Why?

Rivers in Uttarakhand is so Famous, But Why?

उत्तराखंड राज्य को देवभूमि कहा जाता है क्योंकि पौराणिक काल से ही यहाँ पर देवी देवताओं का निवास रहा है | उत्तराखंड की नदियाँ पूरे विश्व में अपनी पवित्रता के लिए प्रसिद्ध हैं तथा देवभूमि उत्तराखंड बहुत सी पवित्र नदियों का उद्गम स्थल है | “उत्तराखंड सामान्य ज्ञान” की आज की पोस्ट में हम कुछ प्रसिद्ध तथा पवित्र नदियों के बारे में जानेंगे |  

उत्तराखंड में बहने वाली नदियाँ हिन्दू धर्म की आस्था से जुड़े रहने के साथ साथ राज्य के लिए लाभकारी भी हैं क्योकि उत्तराखंड की अधिकतर नदियाँ बिजली उत्पादन की श्रोत हैं, जिनसे भारी मात्रा में बिजली उत्पादित की जाती है |

उत्तराखंड राज्य में बहने वाली 7 प्रमुख नदियाँ तथा उनके उद्गम स्थल

   1.  Alaknanda River (अलकनंदा नदी)

उत्तराखंड राज्य की पवित्र नदी अलकनंदा का प्राचीन नाम विष्णुगंगा है,तथा गंगा के 4 नामों में से एक है | गंगोत्री में गंगा को भागीरथी,केदारनाथ में मंदाकिनी तथा बद्रीनाथ में गंगा को अलकापुरी के नाम से जाना जाता है | देवप्रयाग में अलकनंदा तथा भागीरथी नदियों का संगम होता है तथा देवप्रयाग के बाद भागीरथी और अलकनंदा मिलकर उत्तराखंड की एक और पवित्र नदी गंगा का निर्माण करती हैं | सतोपंथ और भागीरथ खरक नामक हिमनद अलकनंदा नदी के उद्गम स्थल हैं | अलकनंदा नदी की औसत गहराई 1.3 मीटर तथा अधिकतम गहराई 4.4 मीटर है |

Alaknanda River

उत्तराखंड राज्य में होने वाले  नदियों के संगमों में अलकनंदा नदी की महत्वपूर्ण भूमिका है |

    2.  Bhagirathi River (भागीरथी नदी)

उत्तराखंड राज्य की पवित्र नदी भागीरथी गंगा नदी की प्रमुख सहायक नदी है, जिसका उद्गम स्थल उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री धाम से लगभग 20 किलोमीटर दूर गंगोत्री ग्लेशियर अथवा गौमुख है | गंगोत्री ग्लेशियर की लम्बाई लगभग 30 किलोमीटर तथा चौडाई 2 किलोमीटर है जो कि वर्तमान में ग्लोबल वार्मिंग की बजह से कम होती जा रही है |

भागीरथी नदी

 

रुद्रगंगा,केदारगंगा,जाडगंगा,असीमगंगा तथा भिलंगना भागीरथी नदी की प्रमुख सहायक नदियाँ है |

  • रुद्रगंगा गंगोत्री ग्लेशियर के पास रुद्रगेरा नामक ग्लेशियर से निकलती है |
  •  केदारगंगा का उद्गम स्थल केदारताल है |
  • जाडगंगा भैरोघाटी नामक स्थान पर भागीरथी नदी से मिलती है |
  •  असीमगंगा गंगोत्री में भागीरथी नदी से मिलती है |

भागीरथी नदी पर ही विश्व का पांचवा सबसे ऊँचा बांध “टिहरी बांध “ बनाया गया है, जिसकी ऊँचाई 216 मीटर है | टिहरी बांध में 2400 मेगा वाट विधुत उत्पादन होता है, तथा इस बांध से 2,70,000 हेक्टर क्षेत्र की सिंचाई होती है |

टिहरी बांध

गणेशप्रयाग अर्थात पुराना टिहरी शहर (वर्तमान में बांध) में भागीरथी तथा भिलंगना नदियों का संगम होता है| दो पवित्र नदियों भागीरथी तथा अलकनंदा का संगम देवप्रयाग में होता है |

    3.  Ganga River (गंगा नदी)

गौमुख से निकली पवित्र नदी भागीरथी नदी को ही देवप्रयाग के बाद गंगा नदी कहा जाता है | देवप्रयाग में भागीरथी और अलकनंदा दोनों नदियों का संगम होता है, और उसके आगे बहने वाली नदी गंगा कहलाती है | देवप्रयाग में होने वाले संगम को सास – बहू नदियों का संगम भी कहा जाता है|

देवप्रयाग

देवप्रयाग से हरिद्वार तक गंगा की कुल लम्बाई 96 किलोमीटर है | हरिद्वार से लगभग 800 किलोमीटर मैदानी भाग में बहते हुए गंगा नदी इलाहाबाद (प्रयाग) पहुचती है | प्रयाग में ही गंगा नदी का संगम यमुना नदी से होता है | गंगा-यमुना नदियो के संगम को “तीर्थराज प्रयाग” कहा जाता है | यह संगम हिन्दू धर्म का पवित्र स्थल है |

गंगा नदी

गंगा के अनेक रूप हैं तथा बहुत सी कथाएं प्रचलित हैं | पुराणों में गंगा नदी को “मोक्षदायिनी ” बताया गया है | स्वर्ग में अलकनंदा , पृथ्वी में भागीरथी या जाह्न्वी तथा पाताल में गंगा को अधो गंगा या पाताल गंगा के नाम से जाना जाता है |

    4.  Yamuna River (यमुना नदी)

उत्तराखंड राज्य की पवित्र नदी यमुना बन्दरपूंछ पर्वत पर स्थित यमुनोत्री हिमनद के यमुनोत्रीकांठा से निकलती है | ऋषिगंगा,हनुमान गंगा,कृष्णागाड,टोन्स तथा आसन यमुना की सहायक नदियाँ हैं किन्तु, टोन्स नदी यमुना की प्रमुख सहायक नदी है | टोन्स नदी बन्दरपूंछ पर्वत से ही स्वर्गारोहिणी ग्लेशियर से निकलती है |

यमुना नदी


उत्तराखंड में यमुना नदी की लम्बाई 136 किलोमीटर है, जबकि यमुनोत्री से इलाहाबाद तक यमुना की कुल लम्बाई 1384 किलोमीटर है |

यमुना नदी से सम्बंधित पौराणिक मान्यता है कि यमुना को भगवान् सूर्य की पुत्री कहा जाता है | सूर्य की पुत्री होने की बजह से यमुना नदी का एक नाम “सूर्यतनया” भी है , तथा यमराज की बहन होने के कारण यमुना नदी का एक नाम “यमी” भी है |

    5.  Pindar River (पिण्डर नदी)

पिण्डर नदी का उद्गम स्थान पिण्डर ग्लेशियर है | यह नदी पिण्डर ग्लेशियर से निकलकर कर्णप्रयाग तक बहती है | नदी की लम्बाई 105 किलोमीटर है तथा गंगा की यह प्रमुख सहायक नदी है | कर्णप्रयाग में अलकनंदा तथा तथा पिण्डर नदियों का संगम होता है | उत्तराखंड राज्य की  दो प्रमुख नदियों का संगम होने की बजह से यह संगम हिन्दू धर्म का पवित्र स्थल है |          

    6.  Saryu River (सरयू नदी) 

सरयू नदी सरमूल से निकलकर कपकोट,बागेश्वर, शेराघाट और रामेश्वर से बहते हुए पंचेश्वर में काली नदी में गिर जाती है जो कि काली नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है | बैजनाथ तीर्थ और बागेश्वर नगर सरयू नदी के तट पर ही स्थित है |

सरयू नदी


सरयू की प्रथम सहायक नदी गोमती है जो कि सरयू से बागेश्वर में मिलती है | स्थानीय भाषा में सरयू नदी की सरजू कहा जाता है | सरमूल से पंचेश्वर तक इस नदी की लम्बाई 146 किलोमीटर है |

   7.  Ramganga River (रामगंगा नदी)         

रामगंगा को दो भागों में विभाजित किया गया है तथा दोनों का उद्गम स्थल उत्तराखंड में ही है |

1.      पूर्वी रामगंगा

2.      पश्चिमी रामगंगा

पूर्वी रामगंगा उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जिले में स्थित नामिक ग्लेशियर से निकलती है और पूर्व की ओर बहती है | अंत में पूर्वी रामगंगा पिथौरागढ़ के घाट के पास रामेश्वर में सरजू नदी के साथ मिल जाती है|

पश्चिमी रामगंगा पौड़ी,चमोली तथा अल्मोड़ा में फैले दूधातोली पर्वत श्रेणी से निकलती है | इन तीनों जिलों में 155 किलोमीटर बहने के बाद पौड़ी के कालागढ़ नामक स्थान पर यह राज्य से बाहर निकल जाती है | राज्य के बाहर निकलने के बाद यह नदी उत्तर प्रदेश के कन्नौज के पास गंगा नदी से मिल जाती है |

 

रामगंगा नदी

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