` You Will Thank Us - About UTTARAKHAND NATIONAL PARKS You Need To Know

You Will Thank Us - About UTTARAKHAND NATIONAL PARKS You Need To Know

उत्तराखंड सामान्य ज्ञान की इस पोस्ट में आपको Uttarakhand National Parks(उत्तराखंड रास्ट्रीय उद्यान) के बारे में जानकारी दी जाएगी | यदि आप नेशनल पार्क  बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं तो, इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़ें |

Uttarakhand National Parks [उत्तराखंड के रास्ट्रीय उद्यान]

1.      गंगोत्री रास्ट्रीय उद्यान

2.      राजाजी रास्ट्रीय उद्यान

3.      नन्दा देवी रास्ट्रीय उद्यान

4.      कॉर्बेट रास्ट्रीय उद्यान

5.      गोविन्द रास्ट्रीय उद्यान

6.      फूलों की घाटी रास्ट्रीय उद्यान  

Gangotri National Park [गंगोत्री रास्ट्रीय उद्यान]

उत्तराखंड राज्य में स्थित गंगोत्री नेशनल पार्क जनपद उत्तरकाशी में सन 1989 में स्थापित किया गया था | 2390 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला गंगोत्री रास्ट्रीय उद्यान वन्य जीव जैसे- हिम तेंदुआ,हिमालयन भालू,कस्तूरी मृग तथा मोनाल इत्यादि के लिए विश्ब भर में प्रसिद्ध है | क्षेत्रफल के अनुसार यह नेशनल पार्क उत्तराखंड का सबसे बड़ा नेशनल पार्क है |

इस रास्ट्रीय उद्यान का नाम यहाँ पर स्थित गंगोत्री हिमनद के नाम पर रखा गया है | गंगा नदी का उदगम स्थल गौमुख इसी रास्ट्रीय उद्यान के अन्दर स्थित है, जो कि हिन्दुओं के पवित्र स्थलों में से एक है | गंगोत्री रास्ट्रीय उद्यान की समुद्रतल से औसतन ऊँचाई 7083 मीटर है |

Raja ji National Park [राजाजी रास्ट्रीय उद्यान]

जानवरों,पक्षियों और प्राकृतिक सुन्दरता के लिए प्रसिद्ध राजाजी रास्ट्रीय उद्यान की स्थापना सन 1983 में की गयी थी | यह रास्ट्रीय उद्यान पहले “मोतीचूर वन्य जीव अभ्यारण” के नाम से जाना जाता था | 820.42 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस रास्ट्रीय उद्यान का नाम स्वतंत्रता सेनानी चक्रवर्ती रामगोपालाचारी के नाम पर रखा गया था,तथा इसकी घोषणा राजीव गाँधी जी ने की थी | यह रास्ट्रीय उद्यान भारत का 48 वा टाइगर रिजर्व है |

राजाजी नेशनल पार्क


उत्तराखंड राज्य के 3 जिलों देहरादून,हरिद्वार तथा पौड़ी में विस्तृत इस रास्ट्रीय उद्यान में 23 प्रकार के स्तनधारी तथा 313 पक्षियों की प्रजातियाँ पायी जाती हैं | एशियाई हाथी,चीतल,काकर,पैंथर,भालू,टाइगर,साम्भर तथा किंग कोबरा यहाँ के प्रमुख जीव हैं |

पर्यटकों के लिए यह पार्क 15 नबम्बर से 15 जून के बीच खोला जाता है | इस बीच सफारी का आनन्द लेने के लिए देश – विदेश से पर्यटक यहाँ भारी मात्रा में  पहुचते हैं |

Nanda Devi National Park [नन्दा देवी रास्ट्रीय उद्यान]

624 वर्ग किलोमीटर में फैले नन्दा देवी नेशनल पार्क की स्थापना सन 1988 में की गयी थी तथा इसी वर्ष इसे UNESCO द्वारा विश्व धरोहर में शामिल कर लिया गया था |विश्व प्रसिद्ध नन्दा देवी नेशनल पार्क उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में स्थित है | समुद्र तल से इस रास्ट्रीय उद्यान की ऊँचाई लगभग 7816 मीटर है | सर्वप्रथम इसकी स्थापना संजय गाँधी रास्ट्रीय उद्यान के तौर पर की गयी थी परन्तु बाद में इसका नाम बदलकर नन्दा देवी रास्ट्रीय उद्यान कर दिया गया था |

मोनाल

हिमालयन भालू ,मस्क डियर,कस्तूरी मृग,मोनाल,भरल आदि पशु पक्षी नन्दा देवी रास्ट्रीय उद्यान के प्रमुख जीव जंतु हैं| यहाँ पर फूलों की लगभग 312 प्रजातियाँ देखी जा सकती हैं | देवदार,संटी,बुरांश तथा जुनिपर इस रास्ट्रीय उद्यान पर पायी जाने वाली विशेष बनस्पतियां हैं |

Corbet National Park [कोर्बेट नेशनल पार्क]

CORBET NATIONAL PARK (कोर्बेट नेशनल पार्क) की स्थापना 1936 में तत्कालीन गवर्नर सर हैली के नाम पर की गयी थी इसलिए इसका नाम “हैली नेशनल पार्क” भी है |यह भारत का ही नहीं अपितु सम्पूर्ण एशिया का प्रथम नेशनल पार्क है |स्वतंत्रता के बाद इसका नाम “रामगंगा नेशनल पार्क” भी रखा गया था लेकिन 1857 में महान प्रकृति प्रेमी जिम कॉर्बेट की स्मृति में इसका नाम JIM CORBET NATIONAL PARK कर दिया गया |

कॉर्बेट रास्ट्रीय उद्यान

यह नेशनल पार्क नैनीताल जिले के रामनगर में स्थित है जो कि नैनीताल मुख्यालय से लगभग 144 किलोमीटर दूर है | नैनीताल जिले के रामनगर में ही ढिकाला में ही इसका प्रवेश द्वार बनाया गया है| जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क 520.82 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है |यह पौड़ी जिले में 312.76 वर्ग किलोमीटर तथा नैनीताल जिले में 208.8 वर्ग किलोमीटर विस्तृत है |

इस पार्क में पक्षियों की लगभग 570 प्रजातियाँ,25 लगभग सरीसृप प्रजातियाँ व लगभग 75 प्रकार के स्तनधारी जीव पाए जाते हैं | मगरमच्छ,चीतल,शाम्भर,बाघ,हाथी,तेंदुआ ,अजगर तथा हिरन यहाँ के मुख्य जीव हैं |

1 नवम्बर 1973 को इसे भारत का पहला बाघ संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था | इस घोषणा के बाद यहाँ शेरों की संख्या में काफी बढ़ोत्तरी हुई |

Govind National Park [गोविन्द रास्ट्रीय उद्यान]

उत्तरकाशी जिले में स्थित गोविन्द रास्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1980 में की गयी थी | यह रास्ट्रीय उद्यान 472 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है | इस रास्ट्रीय उद्यान का नाम प्रमुख भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता गोविन्द बल्लभ पन्त के नाम पर रखा गया है |

भूरा भालू,कस्तूरी मृग, काला भालू,हिम तेंदुआ तथा मोनाल इत्यादि पशु पक्षियों के लिए गोविन्द नेशनल पार्क पूरे विश्व में प्रसिद्ध है |

पार्क के अन्दर ही “हर की दून” घाटी है जो कि ट्रेकिंग के लिए एक प्रसिद्ध स्थान है |

Valley Of Flowers National Park [फूलों की घाटी रास्ट्रीय उद्यान]

फूलों की घाटी उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित एक रास्ट्रीय उधान है, इस  घाटी की खोज 1931 में फ्रैंक स्मिथ के द्वारा की गयी थी, जो की एक पर्वतारोही थे | स्मिथ को यह घाटी इतनी ज्यादा पसंद आई की उन्होंने इस पर एक पुस्तक Valley Of Flowers लिख डाली | फूलों की घाटी हरियाली और चारों तरफ से हिमालय की चोटियों से घिरी हुई एक अत्यंत खुबसूरत जगह है | फूलों की घाटी के पास पुष्पावती नदी बहती है जो पुष्पतोया ताल से निकलती है और आगे जाकर लक्ष्मण गंगा से मिल जाती है |

फूलों की घाटी

1982 में फूलों की घाटी को विश्व संगठन, यूनेस्को द्वारा रास्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था तथा “नंदा देवी रास्ट्रीय उद्यान” और “फूलों की घाटी रास्ट्रीय उद्यान” को सम्मिलित रूप से विश्व धरोहर में शामिल किया गया था | यह घाटी 87.50 वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है | पर्यटक यहाँ 3 किलोमीटर लम्बी तथा 500 मीटर चौड़ी फूलों की घाटी में रंग बिरंगे फूलों को देखकर आकर्षित होते हैं | फूलों की घाटी महाभारत काल में नंदन वन के नाम से जानी जाती थी| कहा जाता है की हनुमान जी भगवान् राम के छोटे भाई लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी बूटी यही से लाये थे |

valley of flowers

इस रास्ट्रीय उद्यान में गुलाब, कुमुदनी, चम्पा, जुही, बेला ,गुल्दाबली तथा सिल्पाड़ा आदि फूल मन को आकर्षित करते हैं | यहाँ फूलों की लगभग 500 से ज्यादा प्रजातियाँ पायी जाती हैं | यहाँ बुरांश का फूल गुलाब के लाल रंग को भी फीका कर देता है , बुरांश उत्तराखंड का राज्य वृक्ष भी है | भ्रमकमल जो की बिना पानी में होता है वह भी यहाँ बहुतायत मात्रा में पाया जाता है |

 

 

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