` मुक्क्तेश्वर महादेव मन्दिर तथा मुक्क्तेश्वर का इतिहास, Mukteshwar Mahadev Temple And History Of Mukteshwar

मुक्क्तेश्वर महादेव मन्दिर तथा मुक्क्तेश्वर का इतिहास, Mukteshwar Mahadev Temple And History Of Mukteshwar


मुक्क्तेश्वर महादेव मन्दिर [ Mukteshwar Mahadev Temple ]

मुक्क्तेश्वर महादेव मन्दिर नैनीताल जिले में स्थित एक बहुत ही प्राचीन शिव मन्दिर है जो कि मुक्क्तेश्वर के सर्वोच्च बिंदु पर स्थित है | समुद्र तल से इस मन्दिर की ऊँचाई लगभग 2315 मीटर है | पुराणों में शालीनता के रूप में यह भगवान शिव के 18 मुख्या मंदिरों में से एक है तथा यह मन्दिर “मुक्क्तेश्वर महादेव मन्दिर” के नाम से प्रसिद्ध है |
इस मन्दिर में तांबा योनी के साथ सफ़ेद संगमरमर का एक शिवलिंग है, जो कि भ्रम्मा,विष्णु,पार्वती,हनुमान, गणेश तथा नन्दी की मूर्तियों से घिरा हुआ है | इस मन्दिर में प्रवेश करते ही मनुष्य को मानसिक शान्ति का अनुभव होता होता है |

मुक्तेश्वर महादेव मन्दिर


यहाँ पर इंडियन वेटनरी  रिसर्च इंस्टिट्यूट है |

इंडियन वेटनरी  रिसर्च इंस्टिट्यूट :

यह इंस्टिट्यूट 1893 में बनवाया गया था | यहाँ पर जानवरों पर रिसर्च की जाती है | यहाँ पर एक म्युजियम तथा लाइब्रेरी भी है  जहाँ पर जानवरों पर रिसर्च से सम्बन्धित बहुत पुराना सामान तथा पुस्तकें सुरक्षित रखी गयी हैं |

मुक्क्तेश्वर का इतिहास :

मुक्क्तेश्वर अंग्रेजो के समय से बना हुआ उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित एक हिल स्टेशन है | मुक्क्तेश्वर को “भगवान् शिव का घर “ माना जाता है | यहाँ पर भगवान् शिव का एक मन्दिर है जो 10 बी सताब्दी में कत्तियूरी राजाओं  के द्वारा मात्र एक दिन में बनाया गया था, जो की अविस्वस्नीय है | मुक्क्तेश्वर देवदार, बांज, तिलोंज ,काफल तथा पाइन के घने जंगलों से चारों तरफ से घिरा हुआ है | सर्दियों में यहाँ भारी मात्रा में बर्फवारी होती है और बर्फ से ढाका हुआ मुक्क्तेश्वर धाम कैलाश पर्वत की तरह प्रतीत होता है |

मुक्क्तेश्वर महादेव मन्दिर के पास स्थित “चौली की जाली” की मान्यताएं :

शिव जी अक्सर मुक्क्तेश्वर महादेव मन्दिर में तपस्या में लीन रहते थे | कहा जाता है की एक बार भगवान् शिव जब तपस्या में लीन थे तब उस दौरान जागेश्वर के निकट जागेश्वर धाम यात्रा पर निकले बाबा गोरकनाथ का मार्ग रुक गया था, तब उन्होंने अपने गंडासे से विशाल चट्टानों पर वार करके एक छेद का निर्माण कर दिया था,तथा यात्रा पर आगे बढ़ गए थे | 
चौली की जाली की विशेष मान्यता यह है कि,यदि शिवरात्रि के दिन संतान शुख की कामना के साथ यदि कोई महिला इस पत्थर पर बने छेद को पार करती है तो उसे अवश्य ही संतान शुख की प्राप्ति होती है |

How To Reach Mukteshwar Mahadev Temple ? [मुक्क्तेश्वर महादेव मन्दिर कैसे पहुचें ]

By Air

मुक्क्तेश्वर महादेव मन्दिर से निकटतम हवाई अड्डा “पंतनगर हवाई अड्डा “ है जो की इस मन्दिर से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है | इसके बाद यहाँ से पहाड़ी मार्ग के लिए आपको टैक्सी लेनी पड़ेगी या फिर आप स्थानीय बसों से भी यहाँ पहुच सकते हैं |

By Train :   

मुक्क्तेश्वर महादेव मन्दिर के निकटतम रेलवे स्टेशन “काठगोदाम रेलवे स्टेशन “ है जो की मन्दिर से लगभग 72 किलोमीटर की दूरी पर है | इसके बाद आपको यहाँ से टैक्सी या फिर स्थानीय बसों से जाना होगा | रेलवे स्टेशन से मुक्क्तेश्वर महादेव मन्दिर पहुचने में 2 से 3 घंटे का समय लगता है |

By Road

यदि आप by road सफ़र कर रहे हैं तो  मुक्क्तेश्वर महादेव मन्दिर नैनीताल से 51 किलोमीटर की दूरी तथा हल्द्वानी से लगभग 72 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है | आप अपनी सुविधानुसार कही से भी यहाँ पहुच सकते हैं |


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