` उत्तराखंड की वीरांगना “जिया रानी” का इतिहास, HISTORY OF JIA RANI

उत्तराखंड की वीरांगना “जिया रानी” का इतिहास, HISTORY OF JIA RANI

“जिया रानी” का इतिहास

उत्तराखंड की प्रख्यात रानियों में से एक हैं जिया रानी (Jia Rani), जिनके बचपन का नाम “मौला देवी” था | जिया रानी हरिद्वार (मायापुर)  के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं | सन 1192 में सम्पूर्ण देश में तुर्कों का शासन स्थापित हो गया था, किन्तु उसके बाद भी 2 सताब्दी तक किसी तरह हरिद्वार में पुंडीर राज्य बना रहा | तुर्की सेनाओ के हमले लगातार होते रहे और बाद में कुमाँऊँ और गढ़वाल में भी हमले होने लगे |


जिया रानी मन्दिर

एक बार की बात है जब हरिद्वार में तुर्कों का हमला हुआ तो कुमाँऊँ (पिथोरागढ़) के राजा प्रीतम देव ने हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर के सहायता के लिए अपने भतीजे भ्रमदेव को सेना के साथ भेजा | इसके बाद अमरदेव पुंडीर ने अपनी पुत्री मौला देवी का विवाह कत्त्यूरी राजवंश के राजा प्रीतमदेव उर्फ़ प्रथ्वीपाल से कर दिया | जिया रानी पृथ्वी पाल की दूसरी रानी थीं |

कुछ समय बाद जिया रानी के सम्बन्ध  पृथ्वीपाल के साथ ठीक नहीं रहे और वह अपने पुत्र के साथ गोलाघाट चली गयीं | यहाँ पर उन्होंने एक ख़ूबसूरत बाग़ बनवाया, जिसे वर्तमान में “रानीबाग” कहा जाता है | यहाँ पर रानी 12 वर्षों तक रहीं |

1398 के मध्य समय में एशिया के हमलावर तैमूर ने भारत पर हमला किया और दिल्ली मेरठ को रोंद्ता हुआ हरिद्वार पंहुचा | उस समय हरिद्वार में वत्सराजदेव पुंडीर शासन कर रहे थे, उन्होंने तैमूर का बड़ी बहादुरी से सामना किया, किन्तु तैमूर की बड़ी सेना होने के कारण वत्सराजदेव पुंडीर हार का सामना करना पड़ा |

उसी वक़्त तैमूर ने अपनी एक टुकड़ी पहाड़ी राज्यों की तरफ भेज दी| इस बात की सूचना जिया रानी को पहले ही लग गयी , और जिया रानी ने कुमाँऊँ के राजपूतों की एक सेना का गठन किया | जब मुस्लिम टुकड़ी ने रानीबाग पर हमला किया तो राजपूतों की सेना ने तैमूर की सेना का डटकर सामना किया और मुस्लिम सेना को मार गिराया | युद्ध के बाद जिया रानी के सैनिक निश्चिंत हो गए तब ही दूसरी टुकड़ी ने आक्रमण कर दिया और जिया रानी की सेना की हार हुई | अपने सतीत्व की रक्षा के लिए जिया रानी एक गुफा में चुप गयीं |

जब प्रीतम देव को हमले के बारे में पता चला तो  वह स्वं अपनी सेना को लेकर रानीबाग पहुचे और मुस्लिम सेना को मार गिराया और जिया रानी को अपने साथ पिथोरागढ़ ले गए |

जिया रानी गुफा रानीबाग 

जिया रानी गुफा वर्तमान में रानीबाग (काठगोदाम के पास) में स्थित है | यहाँ पर जिया रानी का एक मन्दिर भी है | कत्तियूरी वंसज प्रतिवर्ष यहाँ उनकी स्मृति में पहुचते है और पूजा अर्चना करते है |

जिया रानी गुफा

यह भी कहा जाता है की जिया रानी यहाँ पर चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने के लिए आई थीं | जिया रानी शिवभक्त थीं |

चित्रेश्वर महादेव

जिया रानी का मेला (रानीबाग)

जिया रानी का मेला रानीबाग में प्रतिवर्ष उत्तरायणी में लगता है | इस दिन यहाँ पर उत्तराखंड की वीरांगना जिया रानी की बड़ी धूमधाम से पूजा की जाती है | जिया रानी के वंसज यहाँ पर प्रतिवर्ष रानी की स्मृति में जागर का आयोजन करते है | जागर के समय जियारानी के शौर्य की गाथा गई जाती है |

उत्तरायणी के अवसर पर यहाँ पर एक तरफ स्नान चलता है और दूसरी तरफ जागर में बैर सुनने वालो की भीड़ इकट्ठा रहती है | यह स्थान काठगोदाम रेलवे स्टेशन से 5 किलोमीटर दूर अल्मोड़ा –रानीखेत रोड में स्थित है |

उम्मीद करते हैं की “उत्तराखंड ज्ञान” की यह पोस्ट आपको पसंद आई होगी | यदि आपको हमारी यह पोस्ट पसंद आई तो हमसे जुड़े रहिये और हमारे फेसबुक पेज को LIKE कीजिये तथा उत्तराखंड की अच्छी अच्छी तस्वीरे देखने के लिए हमारे instagram पेज को फॉलो कीजिये |

Facebook Page Link

https://www.facebook.com/uttarakhandgyan.in

Instagram Link

https://www.instagram.com/uttarakhand_gyan.in/?hl=en


धन्यवाद !

टिप्पणी पोस्ट करें

1 टिप्पणियां

If you have any doubts, Please let me know

Emoji
(y)
:)
:(
hihi
:-)
:D
=D
:-d
;(
;-(
@-)
:P
:o
:>)
(o)
:p
(p)
:-s
(m)
8-)
:-t
:-b
b-(
:-#
=p~
x-)
(k)