` History of Sun Temple, Almora (कटारमल सूर्य मन्दिर का इतिहास) in Hindi

History of Sun Temple, Almora (कटारमल सूर्य मन्दिर का इतिहास) in Hindi

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में लमगडा ब्लाक के कटारमल नामक स्थान पर उडीसा के कोर्णाक सूर्य मन्दिर के बाद सम्पूर्ण देश में दूसरा सबसे बड़ा सूर्य मन्दिर स्थित है जिसका नाम कटारमल सूर्य मन्दिर है | यह मन्दिर अल्मोड़ा शहर से 16 किलोमीटर दूर स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है |

कटारमल सूर्य मन्दिर को बाबा आदित्य मन्दिर भी कहा जाता है | समुद्र तल से इस मन्दिर की ऊँचाई लगभग 2116 मीटर है | भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा इस मन्दिर को संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है | वास्तुकला की विशेषताओं और खम्भों पर लिखे शिलालेखों के आधार पर इस मन्दिर का निर्माण 13वी सताब्दी बताया जाता है |

कटारमल सूर्य मन्दिर को “बड़ादित्य सूर्य मन्दिर” भी कहा जाता है ,क्योंकि इस मन्दिर में भगवान् आदित्य की मूर्ती किसी पत्थर अथवा धातु की न होकर बड के पेंड की लकड़ी से बनी है | इस मन्दिर का मुख पूर्व की तरफ है और कहा जाता है कि इस मन्दिर का निर्माण मध्यकाल में कत्यूरी राजा कटारमल ने करवाया था |

कटारमल सूर्य मन्दिर

 

कटारमल सूर्य मन्दिर का इतिहास

कटारमल सूर्य मन्दिर का निर्माण 6 वीं सताब्दी में कत्यूरी राजाओं के द्वारा प्रारम्भ किया गया था किन्तु मन्दिर में खड़े स्तंभों तथा शिलालेखों द्वारा कटारमल सूर्य मन्दिर का निर्माण 13 वीं सताब्दी बताया जाता है | यह मन्दिर कुमाऊँ में सबसे ऊँचे मंदिरों की सूची में शामिल है | मन्दिर को एक ऊँचे बर्गाकार चबूतरे में बनाया गया है | इस मन्दिर के ऊँचे खंडित हो चुके शिखरों को देखकर इसकी विशालता का अनुमान लगाया जा सकता है |

मन्दिर के गर्भगृह का प्रवेश द्वार उत्कीर्णित काष्ठ द्वारा निर्मित था जो वर्तमान में रास्ट्रीय संग्रहालय, नयी दिल्ली में रखा गया है |

मन्दिर में सूर्य की प्रतिमा 12 वीं सताब्दी की बताई जाती है |सूर्य की प्रतिमा के साथ साथ शिव-पार्वती ,लक्ष्मी –नारायण की मूर्तिया भी यहाँ स्थित हैं | ईस्टदेव की मूर्ती 10 वीं सताब्दी में चोरी हो जाने के बाद नक्कासिदार दरवाजों तथा पनेलों को रास्ट्रीय संग्रहालय नयी दिल्ली में रख दिया गया |

कहा जाता है की इस मन्दिर में भक्तिभाव व प्रेम से मांगी हुई हर इच्छा पूर्ण होती है यही कारण है की भक्तो का आवागमन यहाँ वर्षभर रहता है | मन्दिर परिसर में पहुचते ही भक्तो का मन प्रफुल्लित हो उठता है | भक्तो का मानना है की मन्दिर के दर्शन मात्र से ही भक्तों के दुःख ,कस्ट आदि सब दूर हो जाते हैं |

स्थानीय लोगों के अनुसार कटारमलसूर्य मन्दिर का निर्माण कत्यूरी राजा कटारमल देव ने एक ही रात में करवाया था | यहाँ सूर्य की प्रतिमा के अतिरिक्त विष्णु,शिव और गणेश तथा अन्य देवी देवताओं की प्रतिमाएं हैं | बताया जाता है कि यहाँ सभी देवी- देवता भगवान् सूर्य की आराधना किया करते थे |

यह भी जानें :  

 

कैसे पहुचें कटारमल सूर्य मन्दिर ?

By Air :

कटारमल सूर्य मन्दिर से नजदीकी हवाई अड्डा “पंतनगर हवाई अड्डा” है जिसकी दूरी अल्मोड़ा से लगभग 127 किलोमीटर है | हवाई अड्डे से मन्दिर पहुचने के लिए स्थानीय बसों तथा टैक्सी द्वारा जाया जा सकता है |

By Train :

ट्रेन द्वारा कटारमल सूर्य मन्दिर पहुचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम रेलवे स्टेशन है जो कि लगभग 105 किलोमीटर की दूरी पर है | यहाँ पहुचने के बाद पहाड़ी मार्ग प्रारंभ हो जाता है इसलिए आपको आगे जाने के लिए स्थानीय बसों या फिर टैक्सी से जाना होगा|

काठगोदाम रेलवे स्टेशन भारत की राजधानी दिल्ली ,उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तथा उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से रेलमार्ग द्वारा सीधे जुड़ा हुआ है |

By Road  :

उत्तराखंड में हवाई तथा रेल यात्रा सीमित है किन्तु सड़क मार्ग उत्तराखंड में स्थित हर स्थान तक पहुचता है | यदि आप सड़क मार्ग द्वारा कटारमल सूर्य मन्दिर पहुचना चाहते है तो आपको कोसी पहुचना होगा | यहाँ से मन्दिर की दूरी लगभग 1.5 किलोमीटर है जहा पैदल यात्रा करनी पड़ती है |


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