` Dhari Devi Temple (धारी देवी मन्दिर ), Pauri Garhwal

Dhari Devi Temple (धारी देवी मन्दिर ), Pauri Garhwal

उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र के पौड़ी गढ़वाल में स्थित है प्राचीन सिद्धपीठ,जिसे धारी देवी का सिद्धपीठ कहा जाता है, माँ काली को समर्पित धारी देवी मन्दिर यहाँ होने वाले चमत्कारों की बजह से विश्व प्रसिद्ध है | धारी देवी मन्दिर के साक्ष्य 1807 बताया जाता है किन्तु वहां के ही एक महंत का कहना है की धारी देवी मन्दिर 1807 से भी प्राचीन है |प्रतिवर्ष नवरात्री के अवसर पर दूर दूर से श्रद्धालु यहाँ माँ काली का आशीर्वाद लेने आते हैं क्योंकि नवरात्र के समय प्रतिवर्ष यहाँ पर विशेष पूजा का आयोजन होता है | कहा जाता है की माँ काली की कृपा से यहीं पर महाकवि कालिदास को ज्ञान प्राप्त हुआ था | धारी देवी मन्दिर अलकनंदा नदी पर नदी के बीचों बीच स्थित है |

धारी देवी मन्दिर

धारी देवी मन्दिर का रहस्य (Mystery of Dhari Devi Temple)

धारी देवी मन्दिर में होने वाले चमत्कार धारी देवी मन्दिर को रहस्मयी मन्दिर बना देते हैं |कहा जाता है कि इस मन्दिर में माँ काली दिन में 3 बार रूप बदलती हैं ,सुबह वह एक कन्या  के रूप में होती हैं, दिन में युवती तथा रात में बृद्ध महिला का रूप धारण कर लेती हैं | कई श्रद्धालुओं द्वारा माँ काली को रूप बदलते हुए देखा गया है| यही कारण है कि उत्तराखंड में स्थित यह मन्दिर विश्व भर में प्रसिद्ध है |

किवंदती – केदारनाथ में तबाही का कारण है धारी देवी का प्रकोप

मान्यता के अनुसार माँ धारी देवी उत्तराखंड में स्थित चारों धामों की रक्षा करती हैं | धारी देवी को पहाड़ों और तीर्थयात्रियों की रक्षक देवी पुकारा जाता है | उत्तराखंड की रक्षक देवी के प्रकोप को ही केदारनाथ में तबाही का कारण बताया जाता है |

जून माह 2013 में उत्तराखंड में हुई भयंकर तबाही के लिए जहा पर प्रसाशन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है वही पर दूसरी तरफ स्थानीय लोगों द्वारा दावा किया जा रहा है की यह महाविनाश माता धारी देवी के प्रकोप के कारण हुआ है |

उत्तराखंड के श्रीनगर में चल रहे हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट के लिए माँ धारी देवी की प्रतिमा 16 जून शाम को उनके गर्भगृह से स्थान्तरित की गयी थी, जिसका स्थानीय लोगों के द्वारा विरोध भी किया गया था | प्रतिमा जैसे ही अपने स्थान से हटाई गयी उसके कुछ घंटो बाद ही केदारनाथ में तबाही का मंजर सामने आ गया था तथा कुछ ही समय में लाखों लोगों ने इस तबाही में अपनी जान गवा दी थी | इस तबाही से ऐसा प्रतीत हुआ की मानो धारी देवी के द्वारा लोगों तक सन्देश पहुचाया गया हो की हिमालय और यहाँ की नदियों के साथ छेड़छाड़ न की जाए |

कैसे हुई धारी देवी सिद्धपीठ की स्थापना ?

पौराणिक धारणा के अनुसार प्राचीन समय में एक बार भयंकर बाढ़ में कालीमठ मन्दिर बह गया था,  उसी समय माँ काली की प्रतिमा एक चट्टान से सटी होने के कारण धारोगाँव में बहकर आ गयी थी | जैसे ही प्रतिमा उस गाँव में पहुचीं वहां के स्थानीय लोगों को माँ काली की शक्तियों के द्वारा उस प्रतिमा को स्थापित करने के लिए बोला गया, तथा गाँव वालों ने प्रतिमा को धारो गाँव में स्थापित कर दिया, तभी से वहां पर धारी देवी सिद्धपीठ की स्थापना हुई | यह सिद्धपीठ श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति का प्रमुख केंद्र है |

इस सिद्धपीठ के देख रेख,पूजा अर्चना आदि की जिम्मेदारी गाँव के पाण्डेय ब्रहामण परिवार की है | इस परिवार में 3 भाई हैं जो 4 माह के अन्तराल में इस सिद्धपीठ की जिम्मेदारी लेते हैं |


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धारी देवी मन्दिर को 360 डिग्री में देखें -

 

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