` Chitai Golu Devta Temple, Almora – मन्दिर का इतिहास एवं मान्यताएं

Chitai Golu Devta Temple, Almora – मन्दिर का इतिहास एवं मान्यताएं


"उत्तराखंड सामान्य ज्ञान" की इस पोस्ट में आज हम उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा जिले में स्थित न्याय के देवता कहे जाने वाले भगवान् रुपी गोलू देवता के बारे में जानेंगे | हम यह भी जानेंगे की Chitai Golu Devta Temple, Almora का इतिहास क्या है और इसकी क्या मान्यताएं है | यदि आप इन सभी तथ्यों को जानना चाहते हैं तो हमारी इस पोस्ट को अंत तक पढ़ें |

अल्मोड़ा में स्थित चितई गोलू देवता मन्दिर का इतिहास और मान्यताएं


उत्तराखंड राज्य को देवभूमि के नाम से जाता है, क्योंकि यहाँ कई देवी देवताओं का वाश स्थान है | हमारे ईष्ट देवताओं में से एक ईष्ट देव है गोलू देवता जिन्हें न्याय का देवता भी कहा जाता है | कहा जाता है की चितई गोलू देवता मन्दिर का निर्माण 12 वी सताब्दी में चंद वंश के एक सेनापति ने करवाया था|

एक पौराणिक मान्यता के अनुसार चंद राजवंश के राजा राजबहादुर के सेनापति का नाम भी गोलू देव था, जो की अपनी वीरता के लिए प्रसिद्ध हुआ करते थे, और किसी युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो गए थे, तथा उनके सम्मान में अल्मोड़ा के चितई गोलू देवता मन्दिर की स्थापना की गयी थी |

चितई गोलू देव मन्दिर अल्मोड़ा के चितई में पिथौरागढ़ रोड में 8 किलोमीटर दूर स्थित है | यह मुख्य हाइवे से मात्र कुछ ही कदमो पर रोड के किनारे स्थित है | मन्दिर के अन्दर गोलू देवता घोड़े पर सवार हैं और उनके हाथ में एक तलवार है |

अल्मोड़ा में स्थित चितई गोलू देवता मन्दिर की मान्यताएं

अल्मोड़ा में स्थित चितई गोलू  देवता की मान्यता इतनी ज्यादा है की यहाँ दर्शनार्थी दर्शन के लिए देश – विदेश से पहुँचते हैं | स्थानीय लोगों के द्वारा इस मन्दिर को “घंटियों वाला मन्दिर” भी पुकारा जाता है | इसका कारण यह की की यहाँ पर इतनी घंटियाँ है की मन्दिर के पुजारी भी नहीं गिन पाए | घंटियों की संख्या इतनी ज्यादा है की अगर उन्हें तोला जाये तो कई टन बजन होगा | मन्दिर परिसर में प्रवेश करते ही घंटियों की पंक्तिया प्रारंभ हो जाती हैं |

चितई मन्दिर में मनोकामना पूरी हो जाए इसलिए यहाँ भक्तों द्वारा अर्जियां लगायी जाती हैं, क्योंकि कहा जाता है कि जिसे कहीं भी न्याय नहीं मिलता है वह गोलू देवता के दरवार में पहुँचता है, और सभी को यहाँ आकर न्याय मिलता है | इसलिए गोलू देवता को “न्याय का देवता ” भी कहा जाता है | भक्त यहाँ स्टाम्प में अपनी मनोकामना लिखकर वहां छोड़ देते है ,और जब उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है तो वहां घंटियाँ चढाते हैं| यही कारण है की इस मन्दिर परिसर में अनगिनत घंटियाँ हैं |

इस मन्दिर की एक मान्यता यह भी है की अगर यहाँ कोई नव बिवाहित जोड़ा आकर मन्नत मांगता है तो उनका रिश्ता सात जन्मों तक बना रहता है|

कुमाऊँ में 4 स्थानों पर प्रसिद्ध गोलू देवता के मन्दिर हैं -

  1. गोलू देवता मन्दिर, चितई ,
  2. अल्मोड़ा       चम्पावत गोलू मन्दिर ,
  3. चम्पावत   घोडाखाल गोलू मन्दिर, घोडाखाल
  4. तारिखेत गोलू मन्दिर , ताडीखेत


उम्मीद है की उत्तराखंड सामान्य ज्ञान की “गोलू देवता मन्दिर, चितई , अल्मोड़ा” की यह पोस्ट आपको पसंद आई होगी | यदि आपको हमारी यह पोस्ट पसंद आई तो हमारी अन्य पोस्ट भी पढ़िए, आशा है कि आप को हमारी कोई भी पोस्ट पढ़कर निराशा नहीं होगी |

धन्यबाद

 

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