` History and Beliefs of Binsar Mahadev Temple बिनसर महादेव मन्दिर का इतिहास एवं मान्यताएं , अल्मोड़ा, उत्तराखंड

History and Beliefs of Binsar Mahadev Temple बिनसर महादेव मन्दिर का इतिहास एवं मान्यताएं , अल्मोड़ा, उत्तराखंड

उत्तराखंड सामान्य ज्ञान” की इस पोस्ट में उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा जिले में स्थित “बिनसर महादेव  मन्दिर के बारे में तथा वहां से जुडी मान्यताएं और “बिनसर महादेव मन्दिर” के इतिहास के बारे में बताया जाएगा | कृपया पोस्ट को अन्त तक पढ़ें |

About Binsar Mahadev Temple (बिनसर महादेव मन्दिर)

बिनसर महादेव मन्दिर उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा जिले में स्थित पर्यटन स्थल रानीखेत से लगभग 20 किलोमीटर दूर भगवान् शिव का एक बहुत ही सुन्दर तथा भव्य मन्दिर है | समुद्र तल से मन्दिर की ऊँचाई 2480 मीटर है , तथा यह मन्दिर चरों तरफ से देवदार के घने जंगलों से घिरा हुआ है | यह मन्दिर कुन्ज नदी के तट पर स्थित है | भगवान् शिव को समर्पित इस मन्दिर का निर्माण 10 वी सताब्दी में किया गया था | बिनसर महादेव मन्दिर क्षेत्र के लोगों का अपार श्रद्धा का केंद्र है क्योंकि यह भगवान् शिव और माता पार्वती का पवित्र स्थल माना जाता है |

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बिनसर महादेव मन्दिर का इतिहास [History Of Binsar Mahadev Temple]

बिनसर महादेव मन्दिर की ज्यादा जानकारी न होने के कारण इस मन्दिर का इतिहास अधूरा है | लेकिन फिर भी  शोधकर्ताओं के द्वारा मन्दिर के बारे में तथ्यों और मिथकों का पता लगाने का प्रयास किया गया है | बिनसर महादेव मन्दिर पुरातात्विक महत्त्व और बनस्पति के लिए लोकप्रिय है | मन्दिर के सीमित दस्तावेज होने के कारण मन्दिर की खोज के सम्बन्ध में अलग – अलग कहानियां हैं |

बिनसर महादेव

स्थानीय लोगों के अनुसार इस मन्दिर का निर्माण मात्र एक दिन में पांडवो के द्वारा करवाया गया था |

शोधकर्ताओं के अनुसार इस मन्दिर को राजा पीथू ने अपने पिता बिन्दू की याद में बनवाया था, इसलिए इस मन्दिर को बिदुवेश्वर मन्दिर के नाम से भी जाना जाता है |

बिनसर महादेव मन्दिर की मान्यताएं [Beliefs Of Binsar Mahadev Temple]

स्थानीय लोगों के अनुसार प्राचीन में निकटवर्ती गाँव सौनी में मनिहार लोग रहते थे | किसी एक मनिहार की गाय प्रतिदिन बिनसर क्षेत्र में घास चरने जाती थी, वह गाय दुधारू थी | घर आने पर उस गाय का दूध निकला रहता था | इस बात से परेशान होकर एक दिन वह मनिहार गाय के पीछे पीछे जंगल में जा पंहुचा | उसने देखा की गाय वहां स्थित एक शिला पर खड़े होकर दूध छोड़ रही थी, और शिला दूध पी रही थी | गुस्से में आकर मनिहार ने उस शिला में कुल्हाड़ी के पिछले हिस्से से प्रहार किया, तब शिला में से रक्त की धार बहने लगी | उसी रात बाबा ने स्वपन में आकर मनिहारों  को गाँव छोड़ने को कहा और सभी मनिहार गाँव छोड़कर रामनगर में बस गए |

बिनसर महादेव  मन्दिर की एक मान्यता यह भी है कि सौनी बिनसर के निकट किरौला गाँव में 65 वर्षीय बिना संतान के वृद्ध रहते थे | सपने में उन्हें एक साधू ने दर्शन दिए और कहा कि कुन्ज नदी के तट पर झाड़ियों में एक शिवलिंग पड़ा है उसे प्रतिष्ठित कर मन्दिर का निर्माण करो | उस वियक्ति ने आदेश पाकर मन्दिर का निर्माण करवाया और उसे पुत्र की प्राप्ति हुई | पूर्व में इस स्थान पर एक छोटा मन्दिर स्थापित किया गया था |

वर्ष 1959 में श्री पंच दशनाम जूना अखाडा से जुड़े भ्रमालीन नागा बाबा मोहन गिरी  के नेतृत्व में इस भव्य मन्दिर का जीर्णोधार प्रारम्भ किया गया | इस मन्दिर में वर्ष 1970 से अखण्ड ज्योति जल रही है |

 

खुबसूरत वादियों के बीच स्थित बिनसर महादेव


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