` Garjiya Devi Temple, गर्जिया देवी मन्दिर - Ramnagar, Uttarakhand

Garjiya Devi Temple, गर्जिया देवी मन्दिर - Ramnagar, Uttarakhand


गर्जिया देवी मन्दिर के बारे में [ About Garjiya Devi Temple ]

गर्जिया देवी मन्दिर जिसे गिरिजा देवी मन्दिर भी कहा जाता है, उत्तराखंड राज्य के नैनीताल जिले में रामनगर में प्रसिद्ध मन्दिर है | यह मन्दिर कोसी नदी के बीचों बीच एक छोटी सी पहाड़ी के शीर्ष पर बना हुआ है | यह मन्दिर माता पार्वती के प्रमुख मंदिरों में से एक है, माँ पार्वती का एक नाम “गिरिजा” भी है | माता पार्वती गिरिराज हिमालय की पुत्री थीं इसलिए इन्हें गिरिजा नाम से जाना जाता है |
वर्तमान में इस मन्दिर में माता गिरिजा /पार्वती की भव्य मूर्ती स्थापित है , तथा इसके साथ ही यहाँ पर भैरव ,माता सरस्वती तथा गणेश जी की मूर्तियाँ भी स्थापित की गयी हैं | नव विबाहितायें यहाँ आकर अटल सुहाग की कामना करती हैं | निसंतान दम्पति यहाँ माता के चरणों में माथा टेकने आते हैं |
उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित गर्जिया देवी मन्दिर

गर्जिया देवी मन्दिर का इतिहास [History Of Garjiya Devi Temple in Hindi]

इतिहासकारों के अनुसार जिस स्थान पर वर्तमान में रामनगर बसा हुआ है वहां पर कोसी नदी के ही किनारे प्राचीनकाल में विराटनगर था|
  • ·         कत्तियूरी राजाओं से पहले इस स्थान पर कुरू राजवंश तथा अन्य कई राजवंशों का शासन हुआ करता था|
  • ·         कत्तियूरी राजाओं के अलावा इस स्थान पर गोरखा वंश और अंग्रेज शासकों द्वारा राज्य किया गया था |
  • ·         महाभारत काल के समय में यह राज्य इन्द्रप्रस्थ साम्राज्य के अधिपत्य में था |
वर्ष 1940 में इस मन्दिर की स्थिति आज जैसी नहीं थी , प्राचीनकाल में इसे उपटा देवी के नाम से जाना जाता था | जनमानस की धारणा के अनुसार गर्जिया मन्दिर जिस टीले पर है वह टीला कोसी नदी की बाढ़ में किसी उपरी क्षेत्र से बहकर आ रहा था, तब भैरव द्वारा मन्दिर को टीले के साथ बहता देखकर रोकने का प्रयास किया गया तथा उनके द्वारा कहे गए शव्द थे की यहाँ पर ठहरो और मेरे साथ निवास करो,तब से गर्जिया में देवी उपटा निवास कर रही हैं |

धार्मिक मान्यता :

मान्यता है की वर्ष 1940 से पूर्व यह स्थान चारों तरफ से घने जंगलों से घिरा हुआ था, यहाँ पर जंगली जानवरों का प्रकोप बहुत ज्यादा था | सर्वप्रथम जंगल विभाग के कुछ कर्मचारियों तथा स्थानीय लोगों के द्वारा टीले पर मूर्ती को देखा गया  और वहां  पर उन्हें माता जगजननी की उपस्थिति का एहसास हुआ |
उसके बाद भक्त्गढ़ लोग घने जंगलो के बीच,कोसी नदी की बहती हुई प्रबल धारा को पार करते हुए, जंगली जानवरों से बेख़ौफ़ माता के दर्शन के लिए वह पहुचने लगे | कहा जाता है की टीले के पास माँ दुर्गा का वाहन शेर वहां पर भयंकर गर्जन किया करता था और स्थानीय लोगों  के द्वारा शेर को मन्दिर की परोक्रमा करते हुए  हुए कई बार देखा गया था |

गर्जिया मन्दिर में कब होता है भक्तों का आगमन ?

माता गिरिजा देवी के दर्शन तथा पतित पावनी कोशिकी (कोसी नदी) में स्नान हेतु कार्तिक पूर्णिमा में गंगा स्नान पर्व के समय यहाँ पर श्रधालुयों की भारी संख्या में भीड़ उमड़ती है | इसके अतिरिक्त गंगा दशहरा, नव दुर्गा , शिवरात्री तथा बसंत पंचमी के समय भी काफी संख्या में दर्शनार्थी यहाँ पर पहुचते हैं |
माता गिरिजा की पूजा के उपरान्त बाबा भैरव को चावल और मॉस की दाल चढ़ाकर पूजा अर्चना करना आवश्यक माना जाता है, कहा जाता है की भैरव की पूजा के बाद ही माँ गिरिजा की पूजा का सम्पूर्ण फल प्राप्त होता है |

गर्जिया देवी मन्दिर कैसे पहुचें ? [How To Reach Garjiya Devi Temple]

गर्जिया देवी मन्दिर पहुचने के लिए नैनीताल जिले में स्थित रामनगर तक बस या फिर रेल द्वारा आसानी से पंहुचा जा सकता है , इसके बाद यहाँ से आगे जाने के लिए टैक्सी आराम से मिल जाती है | रामनगर शहर से गर्जिया  मन्दिर के बीच की दूरी लगभग 15 किलोमीटर है |
यात्री यहाँ  से कोर्बेट नेशनल पार्क (Corbet National Park) भी जा सकते हैं और प्रकृति की सुन्दरता को देख  सकते हैं |
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