` उत्तराखंड राज्य के कुमाऊं मंडल में जिले List Of All Districts Of Kumoun In Uttarakhand

उत्तराखंड राज्य के कुमाऊं मंडल में जिले List Of All Districts Of Kumoun In Uttarakhand

नैनीताल

नैनीताल कुमाऊं मंडल का एक जिला होने के साथ एक बहुत ही सुन्दर टूरिस्ट प्लेस भी है | नैनीताल को सरोवर नगरी तथा झीलों की नगरी के नाम से भी जाना जाता है | नैनीताल नगर तीन ओर से टिफिन टॉप,चाइनापीक, स्नोव्यू, शेर का डांडा आदि ऊँची – ऊँची पहाड़ियों से घिरा हुआ है| नैनीताल समुद्र तल से लगभग 1938 मीटर की ऊँचाई पर बसा हुआ है |

इस नगर के बीच में "नैनीझील" है जो की बहुत सुन्दर दिखाई देती है | इस झील की लम्बाई 1500 मीटर तथा चौड़ाई 510 मीटर है | यह झील तीन ओर से 7 पहाड़ियों से घिरी हुई है | ताल के दोनों तरफ सड़क बनी हुई है , ताल का उपरी हिस्सा "मल्लीताल" तथा निचला हिस्सा "तल्लीताल" के नाम से जाना जाता है | नैनीताल झील की खोज 1841 में पीटर बैरन ने की थी | पहले नैनीताल को त्रि-ऋषि सरोवर कहा जाता था |

1962 में नैनीताल को उत्तर प्रदेश को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया गया था 

 

नैनीताल जिले में तहसीलों तथा विकासखंडों (BLOCKS) की संख्या क्रमशः 9 तथा 8 हैं

तहसील

विकासखंड (BLOCKS)

नैनीताल
हल्द्वानी
रामनगर
भीमताल
हल्द्वानी
रामगढ़
धारी
कोटाबाग
वेतालघाट
रामनगर
लालकुआ
वेतालघाट
कालाढूंगी
ओखलकांडा
कुश्याकुटौली
धारी
खंसियु
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नैनीताल जिले में पर्यटन स्थल

नैना देवी मंदिर

यह मंदिर नैनी झील के किनारे नैनीताल के उपरी भाग मल्लीताल में स्थित है | नैना देवी मंदिर माँ नैना देवी का एक भव्य मंदिर है | यहाँ माता सती की आँख की पूजा होने के कारण इसका नाम नैना देवी पड़ा | प्राचीन नैना देवी मंदिर का निर्माण श्री मोतीराम शाह जी ने कराया था, लेकिन 1880 के भीषण भू-स्खलन के आने पर यह नष्ट हो गया था | दबी मूर्ति को निकलकर 1882 में पुनः स्थापना की गयी |

नैनी पीक

नैनीताल की सबसे ऊँची चोटी नैनीपीक है, जिसकी ऊँचाई 2611 मीटर है, यह चोटी शहर से 5.5 किलोमीटर दूर है | यहाँ से हिमालय का सुन्दर दृश्य आसानी से देखा जा सकता है |

स्नोव्यू

इस शिखर की ऊँचाई 2270 मीटर है, यह नैनीताल का अति आकर्षक स्थल है | यहाँ पैदल मार्ग या फिर रोपवे की सहायता से जाया जाता है | रोपवे स्टेशन मल्लीताल में स्थित है |

नैनी झील

नैनीझील 7 पहाड़ियों से घिरी हुई है तथा इस झील का आकार नैन (आँख) जैसा है | इस झील का नाम नैना देवी के नाम पर ही पड़ा | पौराणिक कथाओं में बताया जाता है की जब भगवान् शिव देवी सती के मृत शरीर को ले जा रहे थे तो उनकी आँख यहाँ पर गिरी और झील का निर्माण हो गया |

भवाली

भवाली शहर समुद्र तल से 1106 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है | नैनीताल नगर से इस शहर की दूरी 11 किलोमीटर है | यह शहर अपनी प्राकृतिक सुन्दरता तथा पर्वतीय फल बाज़ार के लिए प्रसिद्ध है |

भीमताल

भीमताल नैनीताल जिले का एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है |यह समुद्र तल से 1370 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है, भीमताल की दूरी भवाली से 11 किलोमीटर तथा नैनीताल से 22 किलोमीटर है | भीमताल की सौन्दर्यपूर्ण झील के बीच में एक टापू है, जिसमे Aquarium स्थित है | यह झील नैनीताल झील से बड़ी है |

मुक्तेश्वर

मुक्तेश्वर नैनीताल जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है | यह समुद्र तल से लगभग 3000 मीटर की ऊँचाई पर है | हल्द्वानी से इसकी दूरी 51 किलोमीटर है | मुक्तेश्वर में भारतीय पशु चिकित्सा शोध संसथान 1890 से स्थापित है |यह नगर बांज के घने जंगलों से घिरा हुआ एक रमणीय स्थल है |

रामनगर

यह नगर 1850 में "कमिश्नर रैमजे" द्वारा बसाया गया था | रामनगर के पुराने नाम रैमजे नगर तथा रामजी नगर भी हैं | यह शहर कोसी नदी के तट पर बसा हुआ है | कॉर्बेट नेशनल पार्क होने के कारण यह एक पर्यटक स्थल भी है | यहाँ लोग देश विदेश से भ्रमण के लिए आते हैं. तथा प्राक्रतिक सुन्दरता और तरह-तरह के जानवरों को देखते हैं|
रामनगर से 10 किलोमीटर दूर रानीखेत मार्ग पर कोसी नदी के बीचो बीच एक टापू पर "गर्जिया मंदिर" स्थित है , यहाँ माता पार्वती की पूजा की जाती है |यहाँ के पास में ही सीतावनी मंदिर है जहा महश्री वाल्मीकि जी का आश्रम था |

    

पिथौरागढ़

 
पिथौरागढ़ जिले का गठन 24 फरबरी 1960 को हुआ था, इसका प्राचीन नाम शोरघाटी था | 15 सितम्बर 1997 को इसकी तहसील चम्पावत को अलग करके चम्पावत जिला बनाया गया | पिथौरागढ़ की ऊँचाई समुद्र तल से 1636 मीटर है |
पिथौरागढ़ को राय पिथौरा की राजधानी कहा जाता है ,जिन्होंने नेपाल को कई बार पराजित किया था और राजा पृथ्वी शाह के नाम से प्रसिद्ध हो गए | पिथौरागढ़ पहले अल्मोड़ा जनपद की एक तहसील हुआ करता था ,1960 को जिला घोषित किया गया |
2011 की जनगणना के अनुसार पिथौरागढ़ कुमाऊं मंडल का सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाला जिला है |

PITHORAGARH FORT


पिथौरागढ़ किला एक पुराना किला है, जिसे गोरखों ने बनवाया था | अंग्रेजों के द्वारा इसे लंदन फोर्ट नाम दिया गया था

 

पिथौरागढ़ जिले में 10 तहसील तथा 8 विकासखंड (BLOCKS) हैं

तहसील

विकासखंड (BLOCKS)

पिथौरागढ़
मुनस्यारी
मुनस्यारी
धारचुला
धारचूला
बेरीनाग
डीडीहाट
डीडीहाट
बेरीनाग
कनाली छीना
बंगापानी
गंगोलीहाट
गढाईगंगोली
पिथौरागढ़
देवल थल
मूनाकोट
कनाली छीना
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गंगोलीहाट
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TOURIST DESTINATIONS OF PITHORAGARH

मुनस्यारी, ओम पर्वत, मिलम ग्लेशियर, हाटकालिका मंदिर, पाताल भुवनेश्वर तथा अस्कोट इस जिले के टूरिस्ट प्लेस (TOURIST PLACE) हैं | कैलाश मानसरोवर यात्रा पिथौरागढ़ से होकर ही जाती है |

मुनस्यारी

मुनस्यारी को जोहार क्षेत्र का प्रवेश द्वार कहा जाता है | पिथौरागढ़ से मुनस्यारी तक की दूरी 165 किलोमीटर है | यहाँ से हिमालय की बर्फीली चोटियाँ बहुत ही सुन्दर दिखाई देती हैं | रालम, नामिक तथा मिलम ग्लेशियर का रास्ता यही से होकर जाता है | यहाँ पर बिरथी नामक एक सुन्दर जल प्रपात है |

ओम पर्वत

ओम पर्वत को आदि कैलाश तथा छोटा कैलाश भी कहा जाता है | यहाँ पहुचने के लिए 14 किलोमीटर पैदल यात्रा करनी पड़ती है | शिव भगवान् का यह स्थल बहुत ही रमणीय है |यहाँ पर पार्वती ताल भी स्थित है |

मिलम ग्लेशियर

मिलम ग्लेशियर की दूरी पिथौरागढ़ से लगभग 208 किलोमीटर है, तथा यह मुनस्यारी तहसील में स्थित है | यह ग्लेशियर कुमाऊं का सबसे बड़ा ग्लेशियर है जिसकी लम्बाई 16 किलोमीटर है | यहाँ जाते समय भोजपत्रों के घने जंगल, जड़ी-बूटियाँ तथा कस्तूरी मृग देखने को मिलते हैं | कस्तूरी मृग उत्तराखंड का राज्य पशु है |


पिथौरागढ़ के मंदिर

चंडाक मंदिर
हाट कालिका मंदिर
कोटगाडी मंदिर
श्रीकोट
पाताल भुवनेश्वर मंदिर
कामाख्या देवी मंदिर
कपिलेश्वर मंदिर
योस्टामानु मंदिर


पिथौरागढ़ के मेले/ उत्सव  

        
        थल मेला 
        कन्डाली मेला 
        छलिया गंगावली उत्सव 
        हिल्जात्रा उत्सव 
        नागपंचमी मेला
               जौलजीवी मेला (पशु मेला)



    उधम सिंह नगर


कुमाऊं के सबसे दक्षिणी भाग में एक पतली पट्टी के रूप में उधम सिंह नगर स्थित है | इस जिले का गठन 1995 में किया गया था | यह जिला तीन उपभागों रुद्रपुर , खटीमा तथा काशीपुर से मिलकर बना है | 
यह एक प्रगतिशील जनपद है, हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, कुमाउनी सभी प्रकार के लोग यहाँ निवास करते हैं तथा साथ में ही थारु और बोक्सा जनजाति के लोग भी यहाँ निवास करते है | यह जिला समतल होने के कारण रेल तथा बसों इत्यादि के जरिये सभी जगहों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है |
नानकमत्ता साहिब यहाँ का प्रमुख दार्शनिक स्थल है | यह खटीमा पानीपत रास्ट्रीय राजमार्ग पर सिक्खों का पवित्र तीर्थस्थल स्थित है | यह विशाल नानक सागर बांध के किनारे स्थित है |

उधम सिंह नगर जिले का मुख्यालय रुद्रपुर में है | रुद्रपुर को चन्द्र वंश के रुद्रचंद्र ने बसाया था | इस क्षेत्र के उत्तर में कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर एक छोटा सा नगर पंतनगर स्थित है जहा पर पंतनगर विश्वविद्यालय है | उधम सिंह नगर पहले नैनीताल जिले का ही एक हिस्सा था | इस जिले में 16 नगर निकाय तथा 17 पुलिस स्टेशन हैं |


बागेश्वर


यह जिला "सरयू" तथा "गोमती" नदी के तट पर बसा हुआ है |बागेश्वर की स्थापना 15 सितम्बर 1997 में हुई थी ,इसे उत्तर का वाराणसी कहा जाता है | यह जिला अल्मोड़ा से 90 किलोमीटर की दूरी पर हिमालय की घाटी में स्थित है | 2011 की जनगणना के अनुसार बागेश्वर सबसे कम नगरीकृत वाला जिला है | इस जिले में स्थित कौसानी में 1929 में महात्मा गाँधी ने यात्रा की थी |

 

बागेश्वर की तहसीलें तथा विकासखंड

तहसील

विकासखंड(BLOCKS)

बागेश्वर
बागेश्वर
कपकोट
कपकोट
गरुड
गरुड़
कांडा
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दुकनापुरी
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काफलीगैर
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बागेश्वर के पर्यटन स्थल

बागनाथ मंदिर

यह गोमती और सरयू नदी के संगम पर शिव जी का मंदिर है, इसमें कई देवताओं की मूर्तियाँ हैं | बागेश्वर से 8 किलोमीटर की दूरी पर गौरी गुफा स्थित है |

कौसानी

 "कोसी" और "गरुण" नदियों के बीच पिन्गनाथ पहाड़ी पर समुद्र तल से 1890 मीटर की ऊँचाई पर कौसानी स्थित है | यहाँ से हिमालय दर्शन, सूर्योदय तथा सूर्यास्त का दृश्य बहुत ही रमणीय है | यहाँ का सूर्योदय तथा सूर्यास्त देखने लोग दूर – दूर से आते हैं | कौसानी पहले अल्मोड़ा जिले में था, लेकिन वर्तमान में यह बागेश्वर जिले में आता है | पहले इसका नाम "बलना" था |

पिण्डारी ग्लेशियर

यह ग्लेशियर नंदाकोट शिखर के पश्चिमी ढाल पर स्थित है इसकी लम्बाई 3 किलोमीटर तथा चौड़ाई 380 मीटर है | यहाँ पर "मोनाल पक्षी" , भोजपत्र तथा "कस्तूरी मृग" देखे जा सकते हैं| मोनाल उत्तराखंड का राज्य पक्षी तथा कस्तूरी मृग राज्य पशु है |

 

बागेश्वर में प्रसिद्ध मंदिर, ग्लेशियर तथा दर्रे

मन्दिर

ग्लेशियर

दर्रे

बैजनाथ मन्दिर
सुन्दरढूगा ग्लेशियर
ट्रेल पास दर्रा
बागनाथ मन्दिर
पिण्डारी ग्लेशियर
सुन्दरढूगा दर्रा
कोटभ्रामरी देवी मन्दिर
कफनी ग्लेशियर
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श्रीहारु मन्दिर
मैकताली ग्लेशियर
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ज्वालादेवी मन्दिर
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गौरी मन्दिर
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चंपावत

 
एतिहासिक नगर चम्पावत की स्थापना प्रथम चन्द्रवंशीय राज्य सोमचंद्र द्वारा की गयी थी | इसे कुमाऊ का पहला नगर माना जाता है | 993 से 1563 तक यह चन्द्रवंशीय राजाओं अर्थात सम्पूर्ण कुमाऊं क्षेत्र की राजधानी थी |

हिमालय सोंदर्य की दृष्टि से चम्पावत, उत्तराखंड के सुन्दर भू-भागों में से एक है | इस जिले की स्थापना 15 सितम्बर 1997 को की गयी | इस जिले का प्राचीन नाम "कुमुं काली" है | यह चम्पावती नदी के तट पर स्थित है |
स्कन्दपुराण के मानसखंड के अनुसार चम्पावत में भगवान् विष्णु ने कुर्म अथवा कछुए का अवतार लिया था, कुर्म के नाम पर ही इस जिले का नाम कुमुं पड़ा |

 

चम्पावत जिले में 5 तहसील तथा 4 विकासखंड हैं

तहसील

विकासखंड (BLOCKS)

चम्पावत
चम्पावत
पाटी
लोहाघाट
बाराकोट
बाराकोट
पूर्णागिरी
पाटी
लोहाघाट
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2011 की जनगणना के अनुसार चम्पावत सबसे कम क्षेत्रफल वाला जिला है | जिम कॉर्बेट ने अपनी पुस्तक " MAN ENTER OF KUMAUN " में पाषाण युद्ध का उलेख किया गया है इस युद्ध को बग्वाल कहा जाता है | बग्वाल मेला चम्पावत जिले के देवीधुरा मंदिर में लगता है | इस मेले में होने वाले पाषाण युद्ध को देखने के लिए देश विदेश से लोग यहाँ आते हैं |

 

चम्पावत जिले के प्रसिद्ध तथा दर्शनीय स्थान/स्थल

बालेश्वर महादेव, क्रांतेश्वर महादेव, नागनाथ, एक हतिया नौला, वाणासुर का किला, श्यामताल, लोहाघाट, देवीधुरा, मायावती आश्रम, मीठा-रीठा साहिब तथा पूर्णागिरी मंदिर चम्पावत जिले के बहुत ही प्रसिद्ध तथा दार्शनिक स्थल हैं |

पूर्णागिरी मंदिर

चम्पावत जिले का यह मंदिर समुद्र तल से 3000 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है, जो की पूर्णागिरी शक्तिपीठ टनकपुर से 20 किलोमीटर तथा पिथौरागढ़ से 171 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है |चैत्र नवरात्र को यहाँ मेला लगता मही | इस मंदिर में दर्शन के लिए लोग यहाँ देश विदेश से आते हैं | देश में 108 शक्तिपीठों में से यह भी एक शक्तिपीठ है, यहाँ सती जी का नाभि का अंग गिरा था |

श्यमताल

यह ताल चम्पावत जिले में चम्पावत से 72 किलोमीटर तथा पिथौरागढ़ से 132 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है | इस ताल का मनमोहक दृश्य किसी के भी मन को भा जाता है | इस झील के तट पार स्वामी विवेकानंद जी का आश्रम है |
इस झील का रंग नीला है तथा यह 1.5 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई है | यहाँ लगने वाला झूला मेला बहुत प्रसिद्ध है |

 

चम्पावत जिले के प्रसिद्ध मंदिर

नागनाथ मन्दिर
आदित्य मन्दिर
हिम्लादेवी मन्दिर
बाराही मन्दिर (देवीधुरा)
घटोत्कच मन्दिर
ग्वाल देवता
लड़ीधूरा मन्दिर
बालेश्वर मन्दिर
मानेश्वर मन्दिर
क्रातेश्वर मन्दिर
पूर्णागिरी मन्दिर
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अल्मोड़ा

 
अल्मोड़ा नगर समुद्र तल से 1750 मीटर की ऊँचाई पर कोसी और सुयाल नदियों के मध्य स्थित है | अल्मोड़ा नगर वाले स्थान पर 14वी सताब्दी का भीमचंद द्वारा बनाया गया खगमारा किला था | चन्द्र वंश के 43वें राजा भीम चन्द्र अल्मोड़ा को 1530 में बसाया था | अल्मोड़ा का प्राचीन नाम आलमनगर है, अब इसे ताम्र नगरी के नाम से जाना जाता है | 2011 की जनगणना के अनुसार यह सर्वाधिक लिंगानुपात वाला जिला है |


अल्मोड़ा जिले में 11 तहसील तथा 11 विकासखंड हैं

तहसील

विकासखंड (BLOCKS)

द्वाराहाट
ताडीखेत
अल्मोड़ा
भिक्यासेंड
भिक्यासेंड
धौलादेवी
रानीखेत
स्याल्दे
स्याल्दे
भैंसियाछाना
जैती
हवालबाग
भनौली
द्वाराहाट
सोमेश्वर
ताकुला
चौखुटिया
चौखुटिया
सल्ट
सल्ट
धौलहीना
लमगडा

अल्मोड़ा जिले में भ्रमण के लिए दार्शनिक स्थल

चितई मंदिर

यह मन्दिर अल्मोड़ा नगर से 12 किलोमीटर दूर एक रहस्यमयी मंदिर है जिसकी मान्यता बहुत अधिक है | कहा जाता है की यहाँ के गोलू देवता सभी मनोकामना जल्द से जल्द पूरी करने के साथ साथ न्याय भी शीघ्र कर देते हैं | गोलू देवता को न्याय का देवता कहा जाता है , तथा इस स्थल को परमोच्च न्यायालय माना जाता है |

कटारमल सूर्य मंदिर

उत्तराखंड शैली का यह मंदिर अल्मोड़ा नगर से 15 किलोमीटर दूर स्थित है, जिसका निर्माण राजा कटारमल ने करवाया था | इस मंदिर में मुख्य प्रतिमा बड़ादित्य सूर्य की है | इस मंदिर का कपाट NATIONAL MUSEUM NEW DELHI में रखा हुआ है | इस मंदिर के पास ही गोविन्द बल्लभ पन्त हिमालय पर्यावरण संसथान भी स्थित है |

रानीखेत

अल्मोड़ा नगर से लगभग 50 किलोमीटर दूर झूलादेव पर्वत सृंखला पर पर्यटकों की नगरी रानीखेत समुद्र तल से 6000 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है | यह एक शांत तथा सुन्दर प्रकृति का छावनी नगर है | यहाँ नीचे गगास नदी बहती है तथा पास में ही नागदेव ताल स्थित है | यहाँ सेना के कुमाऊं रेजिमेंट का मुख्यालय है |

 

अल्मोड़ा के प्रसिद्ध मंदिर

चितई मन्दिर
जागेश्वर धाम
बिनसर मन्दिर
सोमनाथ मन्दिर
केसर देवी मन्दिर
कटारमल सूर्य मन्दिर
गड़नाथ मन्दिर
रणचंडी देवी मन्दिर
कसार देवी मन्दिर
पर्वतेश्वर मन्दिर
नन्दादेवी मन्दिर
दूनागिरी मन्दिर


अल्मोड़ा जिले के प्रसिद्ध मेले

        1.      सोमनाथ का मेला (पशु मेला)
        2.      नंदा देवी मेला
    `   3.      गड्नाथ मेला
        4.      स्याल्दे बिखौती मेला
        5.      गोल्ज्यू मेला
        6.      शहीद मेला

 

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