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हरिद्वार

MAAYANAGARI
 
हरिद्वार शिवालिक पर्वत के "विल्व" और "नील" पर्वत श्रेणी के मध्य भाग में Right Side में स्थित है | जिसे 28 दिसम्बर 1988 को सहारनपुर से अलग किया गया था | कपिल मुनि के तपस्या करने के कारण इसका नाम कपिला भी है | राजा विक्रमादित्य ने अपने बड़े भाई भात्रहरी की याद में यहाँ पर ब्रह्त्हरी की पौड़ी का निर्माण कराया था जिसे वर्तमान में हर की पौड़ी कहते हैं| मध्यकाल में अकबर के सेनापति मान सिंह ने हर की पौड़ी का जीर्णोधार करवाया था | यूरोपियन यात्री "TOM CORYET" ने जब हरिद्वार की यात्रा की थी, तो इसे विश्व की राजधानी कहा था | हरिद्वार में होने वाला "कुम्भ मेला" विश्व प्रसिद्ध है |

हरिद्वार के उपनाम :

मायानगरी, स्वर्ण द्वार ,मायापुरी,गंगाद्वार,तीर्थ स्थलों का प्रवेश द्वार, उत्तर भारत का केरल तथा कपिला ये सभी हरिद्वार के उपनाम हैं |

हरिद्वार की तहसीलें

हरिद्वार में विकासखंड (BLOCKS)

हरिद्वार
रूडकी
रूडकी
भगवानपुर
भगवानपुर
लक्सर
लक्सर
नारसन
नारसन
खानपुर
-
बहादराबाद

1847 में रूडकी में स्थापित ASIA का प्रथम इंजीनियरिंग कॉलेज- "THOMAS SCHOOLOF CIVIL ENGINEERING" को 1 जनवरी 2002 में IIT(सातवां) का दर्जा दिया गया था |

हरिद्वार के कुछ मंदिर जो विश्व प्रसिद्ध हैं -

मायादेवी मंदिर
मनसा देवी
चंडी देवी
विल्वकेश्वर महादेव
भीम गोंडा मंदिर
श्री गंगा मंदिर
मकरवाहिनी गंगा मंदिर
गोरखनाथ मंदिर
भारत माता मंदिर
-

 

गंगा मंदिर का निर्माण राजा मान सिंह ने करवाया था | 
 

 देहरादून 

EDUCATIONAL HUB IN UTTARAKHAND
 
देहरादून का प्राचीन नाम "द्रोण नगरी" तथा "डेरादून" था | देहरादून की स्थापना 1817 में हुई थी | हरिद्वार से देहरादून तक की दूरी लगभग 55 किलोमीटर है | देहरादून में 1935 में सतीश रंजन दास ने "DOON COLLEGE" की नीव डाली थी, जो भारत का प्रथम पंजीकृत स्कूल है | देहरादून में रास्ट्रीय जल सरक्षण कार्यालय, भारतीय वन्य जीव संसथान, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण तथा भारतीय बनस्पति सर्वेक्षण विभाग हैं |

देहरादून में "इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ ड्रिलिंग टेक्नोलॉजी" तथा "NIVH (NATIONALINSTITUTE OF VISUALLY HANDICAPPED)" संस्थान स्थित हैं,तथा "रास्ट्रीय मानसिक चिकत्सा संस्थान देहरादून के सेलाकुई में है |

2011 की जनगणना के अनुसार देहरादून सर्वाधिक साक्षरता ,सर्वाधिक महिला साक्षरता, सर्वाधिक नगरीकृत जिला है |

देहरादून में तहसीलें

देहरादून में विकासखंड (BLOCKS)

चकराता
रायपुर
विकासनगर
चकराता
देहरादून
डोईवाला
ऋषिकेश
कालसी
त्यूनी
विकासनगर
डोईवाला
सहसपुर
कालसी
-


देहरादून जिले में प्रसिद्ध मन्दिर:

देहरादून के प्रसिद्ध मंदिर

देहरादून में लगने वाले प्रसिद्ध मेले

टपकेश्वर
जौनसार भाभर
बुद्धा
महासू देवता मेला
महासु
डाट काली मंदिर
वीर केसरी चंद मेला
संतलादेवी मंदिर
-
लक्ष्मण सिद्ध मंदिर
-

IMPORTANT POINTS :


हनौल : हनौल जौनसारी जनजाति का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है जो टोंस नदी के तट पर है |

त्यूनी: त्यूनी से लोहाघाट राजमार्ग बन रहा है जिसे हिमालय राजमार्ग के नाम से जाना जाता है|

टपकेश्वर : टपकेश्वर टोंस नदी के तट पर स्थित भगवान् शिव जी का मंदिर है |
 

उत्तरकाशी

उत्तर का कशी
 
उत्तरकाशी गढ़वाल मंडल में स्थित एक जिला है, जिसका प्राचीन नाम "बाड़ाहाट" तहत "उत्तर का काशी " था | उत्तरकाशी का गठन 24 फरवरी 1960 में हुआ था | 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तरकाशी उत्तराखंड का सबसे कम जनसँख्या घनत्व वाला जिला है| 
प्रमुख दार्शनिक स्थल "गंगोत्री" तथा "यमुनोत्री" उत्तरकाशी जिले में स्थित हैं | हर्सिल, हर की दून , हनुमान चट्टी ,जानकी चट्टी , फूल चट्टी इत्यादि पर्यटन स्थल भी उत्तरकाशी जिले में ही स्थित हैं | उत्तरकाशी में स्थित गौमुख ,हर्षिल तथा गंगोत्री भागीरथी नदी के तट पर स्थित हैं |

उत्तरकाशी की तहसीलें तथा BLOCKS :

उत्तरकाशी जिले में 6 तहसील तथा 6 BLOCKS हैं |

तहसीलें

विकासखंड (BLOCKS)

भट्टबाडी
पुरौला
डुंडा
नौगाँव
पुरौला
भट्टबाडी
मोरी
डुंडा
चिन्यालीसोड
चिन्यालीसोड
बडकोट
मोरी

उत्तरकाशी में प्रसिद्ध मंदिर:

विश्वनाथ
कुट्टी देवी मंदिर
रेणुका देवी मंदिर
चर्दा मति मंदिर
पोख देवता
कर्ण देवता
भैरव देवता मंदिर
कपिल मुनि आश्रम

उत्तरकाशी में ताल, दर्रे, कुण्ड तथा बुग्याल :

ताल

दर्रे

कुण्ड

बुग्याल

डोडीताल
श्रंगकंठ दर्रा
देव कुण्ड
दयारा बुग्याल
नचिकेता ताल
थांग ला दर्रा
गगनी कुण्ड
मानेक बुग्याल
बयांताल
मुलिंग ला दर्रा
सूर्य कुण्ड
केदारकांठा बुग्याल
लामा ताल
कालिंदी दर्रा
-
तपोवन बुग्याल
देवसाड़ी ताल
नेलौंग दर्रा
-
हर की दून
रोहिसाड़ा ताल
सामचोकला दर्रा
-
हर्षिल

चमोली

नन्द प्रयाग - पांच प्रयागों में से एक प्रयाग
 
चमोली जिले की स्थापना 24 फरवरी 1960  में हुई, तथा इसका उपनाम "चाँदपुर गढ़ी" और "अल्कापुरी" है |भगवान् विष्णु के पांच मंदिर जिन्हें "पंच बदरी" कहा जाता है,चमोली जिले में ही स्थित हैं | पंचकेदार में से कल्पनाथ तथा रुद्रनाथ भी चमोली जिले में स्थित हैं | कल्पनाथ में भगवान् शिव की जटाओं तथा रुद्रनाथ में भगवान् शिव के रौद्र मुख की पूजा की जाती है |

चमोली के जोशीमठ का प्राचीन नाम "योषि" है जहाँ पर जियोतिर्रलिंग की स्थापना आदिगुरू शंकराचार्य ने की थी | चमोली में स्थित रूपकुंड झील में 2.5 किलोमीटर की परिधि में नरकंकाल फैले हुए हैं |

स्कन्द, मुचुकुंड, टिम्ममर, गरुण, राम , गणेश तथा ब्यास इत्यादी गुफाएं चमोली जिले में स्थित हैं | भारत के अंतिम गाँव जो की चमोली जिले में स्थित है के पास गणेश गुफा तथा ब्यास गुफा हैं |
 

चमोली जिले में तहसीलें तथा विकासखंड (BLOCKS):

तहसील

विकासखंड(BLOCKS)

चमोली
जोशीमठ
जोशीमठ
जोशीमठ
थराली
थराली
पोखरी
गैरसैण
गैरसैण
नारायणबगड़
घाट
दवाल
आदिबद्री
दसौली

2011 की जनगणना के अनुसार चमोली क्षेत्रफल के अनुसार उत्तराखंड का सबसे बड़ा जिला है |
 

चमोली जिले में स्थित मंदिर :

नंदादेवी
नारायण मंदिर
विष्णु मंदिर
उमा देवी मंदिर
अनुसूया देवी मंदिर

 

 चमोली जिलों में लगने वाले प्रसिद्ध मेले :

2-      शहीद भवानी दत्त जोशी मेला
3-      असेड मेला
4-      रूपकुण्ड महोत्सव
5-      रम्माण लोकनृत्य महोत्सव

चमोली जिले में बद्रीनाथ धाम के समीप 5 कुण्ड, 5 शिलाएं , 5 धाराएँ तथा 5 गुफाएं प्रशिद्ध हैं |

कुण्ड

शिलाएं

धाराएँ

गुफाएं

तप्त कुण्ड
गरुण
कर्मधारा
स्कंद्गुफा
नारद कुण्ड
नारद
प्रहलाद
मन्युकुण्ड
सत्यपथ कुण्ड
मार्केन्य
इन्दुधारा
गरुण
त्रिकोण कुण्ड
नृसिंह
उर्वशीधारा
राम गुफा
मानुषी कुण्ड
ब्रह्म्कपाल
भृगुधारा
गणेश गुफा

टिहरी गढ़वाल

भागीरथी तथा भिलंगना नदिओं का संगम
 
1 अगस्त 1949 को टिहरी मे राजतंत्र को समाप्त कर प्रजातंत की नीव डाली गयी थी, और उसे उत्तर प्रदेश का एक जिला बना दिया गया था | टिहरी के राजा सुदर्शन शाह ने इसे राजधानी के रूप में स्थापित था | सुदर्शन शाह ने 1815 से ही टिहरी को प्रथक राज्य के रूप में स्थापित कर लिया था | "भागीरथी" तथा "भिलंगना" नदियों के संगम पर टिहरी नगर जो कि 29 अक्टूबर 2005 को टिहरी डाम में विलीन हो गया था |
पुराना टिहरी समुद्र तल से 770 मीटर की ऊँचाई पर स्थित ऋषिकेश से 84 किलोमीटर दूर स्थित है | देवप्रयाग , चम्बा, चन्द्रबनी, धनौल्टी यहाँ के प्रमुख स्थल हैं | विश्व प्रशिद्ध "कैम्पटी जल प्रपात" यही पर स्थित है |

 

कैम्पटी जल प्रपात : 

कैम्पटी जल प्रपात समुद्र तल से 1215 मीटर की ऊँचाई पर मसूरी – यमुनोत्री मार्ग पर मसूरी से 15 किलोमीटर दूर टिहरी जिले में ही स्थित है | यह जल पप्रपात सुन्दर घाटी में स्थित है तथा चारों ओर से विशाल पर्वतों से घिरा पड़ा है | झडिपानी तथा धनौल्टी यहाँ के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं |

टिहरी गढ़वाल में 6 बिधानसभा सीटें हैं | टिहरी जिले में 10 तहसील तथा 10 blocks हैं | 

तहसील

विकासखंड (BLOCKS)

टिहरी
टिहरी
नरेन्द्रनगर
चम्बा
प्रतापनगर
प्रतापनगर
जौनपुर
धनशाली
नरेन्द्रनगर
जारवडीधार
कांडीसोड़
कीर्तिनगर
गजा
धनसाली
नैनबाग
धौलधार
धनौल्टी
जारवडीधार

टिहरी के प्रशिद्ध मंदिर :

रघुनाथ मंदिर
सुरकंडा मंदिर
महतकुमारी का मंदिर
कुंजापुरी मंदिर
बूढ़ा केदार
चन्द्रबनी मंदिर
ओडेश्वर मंदिर
रमणा मंदिर
सेममुखेम नागराज मंदिर


बूढ़ा केदार: यह स्थल घनसाली ब्लाक से 31 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, यहाँ पर भगवान् शिव का भव्य तथा अति प्राचीन मंदिर है |

खतलिंग ग्लेशियर :

यह भिलंगना नदी का उद्गम स्थल है, जिसके दाहिने ओर "दूधगंगा ग्लेशियर" है, तथा दूधगंगा ग्लेशियर  के दाहिने ओर "मसूर ताल" है |

पौड़ी गढ़वाल

LANSDOWNE-उत्तराखंड में एक स्वर्ग

पौड़ी गढ़वाल की स्थापना 1840 में हुई तथा इसका उपनाम गढ़वाल है |1815 से 1840 तक ब्रिटिश गढ़वाल की राजधानी श्रीनगर रही, 1840 में राजधानी को श्रीनगर से पौड़ी में स्थान्तरित कर दिया गया |
यह नगर समुद्र तल से 1650 मीटर की ऊँचाई पर कंडोलिया पहाड़ी की ढाल पर स्थित है तथा यहाँ का सर्वोच्च शिखर झंडीधार है |1992 में इसे हिल स्टेशन घोषित कर दिया गया |
नागदेव, खिर्सू, कन्दोलिया मंदिर तथा भीमि की मंगरी इसके समीप के सभी दार्शनिक स्थल हैं |

 

पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित प्रमुख दर्शनीय स्थल :

श्रीनगर :

यह नगर अलकनंदा के बाएं तट पर तथा पौड़ी से 30 किलोमीटर स्थित है | 1803 में आये भूकंप ने इस नगर को अत्यधिक हानि पहुचाई थी | 1940 में अंग्रेजों ने राजधानी को यहाँ से पौड़ी स्थानांतरित किया था |1973 में यहाँ गढ़वाल विश्व बिध्यालय की स्थापना की गयी थी |यह नगर कोटद्वार ,ऋषिकेश ,टिहरी तथा बदरीनाथ से आने वाले सभी मार्गो का जंक्शन है |
धारी देवी मंदिर , सोम का भांडा ,केशोराय मठ ,शंकर मठ तथा कमलेश्वर मंदिर इस नगर के आस पास दर्शनीय स्थल है |

 

कोटद्वार :

कोटद्वार को गढ़वाल का प्रवेश द्वार कहा जाता है जो की एक समतल भूमि पर बसा हुआ है | यहाँ पर पौड़ी गढ़वाल जिले का एकमात्र रेलवे स्टेशन है |यह नगर खोह नदी के दाहिनी ओर बसा हुआ है |कण्वाश्रम , कालागढ़ , सिद्धबली मंदिर ,दुगड्डा यहाँ के प्रमुक दार्शनिक स्थल हैं |
चंदशेखर आजाद ने यहाँ निवासी भवानी सिंह रावत से प्रेरणा लेकर दुगड्डा में ही पिस्टल ट्रेनिंग ली थी |

पौड़ी गढ़वाल जिले में 10 तहसील तथा 15 विकासखंड (BLOCKS) हैं-

तहसील

विकासखंड (BLOCKS)

पौड़ी
पौड़ी
श्रीनगर
बालीसैंड
धूलीसेण
पाषों
कोटद्वार
रिखडीखाल
धूमाकोट
बीरोखाल
लैंसडाउन
दुगड्डा
यमकेश्वर
लैंसडाउन
सतपुली
कोट
चौबतखाल
डूरीखाल
चाकीसैंड
यमकेश्वर
-
पोखड़ा
-
नैनीडांडा
-
खिर्सू
-
पाडाखेत
-
कालजाखाल

पौड़ी गढ़वाल उत्तराखंड का एकमात्र एसा जिला है जहाँ दो नेशनल पार्क हैं,पहला "राजाजी नेशनल पार्क" तथा दूसरा "कॉर्बेट नेशनल पार्क" | उत्तराखंड का "रसायन विभाग" और "वनस्पति विभाग केंद्र" पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर में स्थित है | इस जिले में प्रसिद्ध "गोरखनाथ" गुफा स्थित है |

पौड़ी गढ़वाल में प्रसिद्ध मेले :

वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली मेला
वैकुण्ठ चतुर्दशी मेला
गवाडस्यु मेला
गेंदा कौधिक
मधु गंगा मेला
ताड़केश्वर मेला
कुण्डवाश्रम मेला
सिधबली मेला

पौड़ी गढ़वाल में प्रसिद्ध मंदिर :

नीलकंठ महादेव मंदिर
ज्वाल्पा देवी मंदिर
धारी देवी मंदिर
दुर्गा देवी मंदिर
ताडकेश्वर मंदिर
सिधबली मंदिर
चामुंडा देव मंदिर
-

रुद्रप्रयाग

देवरिया ताल - TOURIST PLACE IN RUDRAPRAYAG
 
 
रुद्रप्रयाग उत्तराखंड का अंतिम जिला है, जिसका गठन 18 सितम्बर 1997 में टिहरी ,पौड़ी तथा चमोली के जिलों को मिलाकर किया गया था | 2011 की जनगणना के अनुसार रुद्रप्रयाग सर्वाधिक साक्षरता (93 %), सर्वाधिक हिन्दू जनसंख्या प्रतिशत और सबसे कम जनसंख्या वाला जिला है | रुद्रप्रयाग "मन्दाकिनी नदी" के तट में बसा हुआ है | रुद्रप्रयाग "केदारनाथ" तथा "बद्रीनाथ" यात्रा का मुख्य पड़ाव तथा पंच प्रयागों में से एक प्रयाग भी है | जिम कॉर्बेट की प्रसिद्ध पुस्तक " रुद्रप्रयाग का आदमखोर बाघ " उनके रुद्रप्रयाग प्रवास पर आधारित है |

रुद्रप्रयाग में 3 तहसील तथा तीन विकासखंड (BLOCKS) है -

तहसील

विकासखंड (BLOCK )

उखीमठ
जखोली
जखोली
अगस्तमुनी
उखीमठ

अन्नकूट मेला तथा विश्वत मेला रुद्रप्रयाग के प्रसिद्ध मेले हैं| अन्नकूट मेला केदारनाथ मंदिर में लगता है |
केदारनाथ द्वादश जियोतिर्लिंगो में से एक है तथा इसकी महत्ता के कारण गढ़वाल का प्राचीन नाम "केदारखण्ड" पड़ा |

रुद्रप्रयाग में स्थित कुण्ड तथा बुग्याल :

कुण्ड

बुग्याल

नंदी कुण्ड
चौपता बुग्याल
गौरी कुण्ड
वर्मी बुग्याल
भौरीअमोला कुण्ड
कसनी खर्क बुग्याल
-
मद्महेश्वर बुग्याल

रुद्रप्रयाग में स्थित मंदिर जो विश्व प्रसिद्ध मंदिरों में से एक हैं तथा यहाँ लोग दर्शन करने देश – विदेश से आते हैं| यह एक रमणीय टूरिस्ट प्लेस भी है |

केदारनाथ मंदिर
तुंगनाथ मंदिर
मद्महेश्वर
कोटेश्वर महादेव
कार्तिक स्वामी मंदिर
कालीमठ
त्रिजुकी नारायण मंदिर
चंद्रशिला
वाडासुर गढ़ मंदिर
ओम्कारेश्वर मंदिर
गुप्तकाशी
इन्द्रसनी मनसा मंदिर
गौरीकुण्ड मंदिर
अगस्तेश्वर महादेव मंदिर
अमरनाथ मंदिर
नारी देवी मंदिर

कालीमठ को कालिदास का जन्मस्थल माना जाता है | मद्महेश्वेर "पाण्डव शैली" का मंदिर है, जहा ब्रहमकमल खिलता है, तथा यहाँ शिव की नाभि की पूजा की जाती है |

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