` उतराखंड में पंच बद्रिओं के नाम तथा उनकी मान्यताएं

उतराखंड में पंच बद्रिओं के नाम तथा उनकी मान्यताएं

                      
नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको "उत्तराखंड सामान्य ज्ञान" की इस पोस्ट में उत्तराखंड  राज्य में स्थित पंचबदरी के बारे में जानकारी देने वाले हैं, हम इस पोस्ट में यह भी बताएँगे की पंच बदरी यात्रा  के लिए आप कब और कैसे जा सकते हैं | यदि आप पंचबदरी के बारे में सभी बातें जानना चाहते हैं तो इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़ें |  

पंचबदरी

उत्तराखंड  के पंच बद्री यानि पांचो  बदरी (भगवान विष्णु) चमोली जिले में स्थित है।
  1. बद्रीनाथ (विशाल बदरी)
  2. आदिबद्री
  3. भविष्य बदरी
  4. बृद्ध बदरी
  5. योग ध्यान बदरी

बद्रीनाथ

बद्रीनाथ हरिद्वार से 384 किलोमीटर तथा जोशीमठ (चमोली ) से 51 किलोमीटर उत्तर में स्थित है।यह चार धामो में से एक है। यह समुद्र तल से 3133 मीटर की ऊंचाई में स्थित है। अत्यधिक ऊंचे नीलकंठ पर्वत शिखर के भव्य पृष्ठ पट सहित , नर एवं नारायण नामक दो पर्वत श्रंखलाओं के पार्श्व में स्थित है।यहां पर एक तप्त कुंड है,जो कि मंदिर की ओर अभिमुख अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है। मंदिर प्रतिवर्ष अप्रैल मई के महीने में खुलता है एवं शरद ऋतु के नवंबर में लगभग बंद हो जाता है। यहां के पुजारी आदि शंकराचार्य के वंशज होते है,जिन्हें रावल कहा जाता है।
 
बद्रीनाथ मन्दिर

बद्रीनाथ मंदिर तीन भागों में बंटा हुआ है -

  1. सिंहद्वार
  2. मंडल
  3. गर्भगृह
मुख्य प्रतिमा काले रंग की है,लेकिन खंडित है। बताया जाता है कि यह प्रतिमा बहुत समय तक नारद कुंड में थी,इसलिए खंडित हो गई। इस प्रतिमा को शंकराचार्य ने बाहर निकालकर स्थापित किया था।

यहां स्नान के लिए पांच कुंड हैं -

तप्तकुंड, नारदकुंड, सत्यपथकुंड, त्रिकोड़कुंड और मानुषिकुंड।
  • मानुषिकुंड में ठंडे जल से स्नान करने की सुविधा है।

आदिबद्री

यह मंदिर कर्णप्रयाग से 16 किलोमीटर की दूरी में स्थित है।यहां पर 16 छोटे मंदिर हैं जिनमें समतल छत वाले 7 मंदिर काफी प्राचीन है। इनकी स्थापना गुप्त काल में की गई थी। मुख्य मंदिर में भगवान विष्णु की 1 मीटर ऊंची प्रतिमा है, जिसे काले पत्थर से बनाया गया है। विष्णु भगवान ही आदि बद्रीनाथ हैं।
 
आदि बद्री मन्दिर चमोली

भविष्य बदरी

यह मंदिर जोशीमठ से 18 किलोमीटर दूर पूर्व में सुबेन नामक स्थान पर स्थित है। यहां विष्णु भगवान की आधी आकृति की पूजा की जाती है।

बृद्ध बदरी

यह मंदिर जोशीमठ (चमोली) से 7 किलोमीटर की दूरी में स्थित है, तथा समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 1380 मीटर है। यहां पर गुरू शंकराचार्य द्वारा बद्रीनाथ की प्रतिमा सर्वप्रथम स्थापित की गई थी।इसी कारण यह प्रतिमा बृद्घ बदरी या पहली बदरी कहलाती है।

योग ध्यान बदरी

यह मंदिर जोशीमठ से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पांडुकेश्वर में है। यहां पर पांडवों ने अज्ञात वास के दौरान तपस्या की थी। शीतकाल में जब कपाट बंद होते हैं तब बद्रीनाथ की चतुर्मुखी मूर्ति यहां लाई जाती है।


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