` UPCOMING KUMBH MELA DATE - NEXT KUMBH MELA WILL BE IN HARIDWAR

UPCOMING KUMBH MELA DATE - NEXT KUMBH MELA WILL BE IN HARIDWAR

"उत्तराखंड सामान्य ज्ञान" की इस पोस्ट में "कुम्भ मेले" से सम्बंधित  जानकारी देने वाले हैं, हम इस पोस्ट में यह भी बताएँगे की कुम्भ का इतिहास क्या है,इसका आयोजन कब होता है ,कुम्भ मेले की तथा गंगा स्नान की DATE क्या है  | यदि आप कुम्भ मेले  से जुडी बहुत सी जानकारी चाहते हैं तो  इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़ें | 

About Kumbh (कुंभ) Mela 

कुंभ, लोक परम्परा का ऐसा पर्व है, जिसमें इतिहास, दर्शन, पौराणिक कथाओं, तथा जनमानस की आस्था का अद्भूत संगम देखने को मिलता है। यह महापर्व एक ऐसा विराट पर्व है, जहाँ पर करोड़ो लोग एक निश्चित ग्रह स्थिति, निश्चित समय, तथा निश्चित स्थान पर एकत्र होकर अपनी धार्मिक आस्था तो निभाते ही है, तथा विचारों का आदान-प्रदान भी करते है। 

 कुंभ का इतिहास

कुंभ मेले का हिन्दू धर्म में काफी महत्व है, धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार कुंभ मेले की कहानी समुन्द्र मंथन से शुरू होती है। जब मदरांचल पर्वत तथा वासुकी नाग की सहायता से देवताओं तथा असुरों ने समुन्द्र की अपार सम्पदा को निकालने की ठानी। 
मंथन से 14 बहुमूल्य रत्नों में विष और अमृत भी निकला। विष से पूरे विश्व में कोहराम मच गया था, जिसे न तो देवता लेना चाहते थे, न ही असुर। तब भगवान शिव ने सारा विष पी लिया,जिस कारण शिव को नीलकंठ कहा जाता है। 
अमृत को लेकर असुरों तथा देवताओं में युद्ध छिड़ गया। इसी छिना-झपटी में अमृत की बूंदे पृथ्वी के चार स्थानों हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन तथा नासिक में गिरी, अतः इसी अमृत की प्राप्ति की के लिए प्रत्येक 12 वर्षों में इन स्थानों पर कुंभ का आयोजन होता रहा है।

कुंभ का आयोजन 

कुंभ मेले का आयोजन प्रत्येक 12 वर्ष में गंगा के तट पर प्रयाग तथा हरिद्वार में, शिप्रा नदी के तट पर उज्जैन में तथा गोदावरी नदी के तट पर नासिक में एक निश्चित ग्रह स्थिति में होता है। उज्जैन तथा नासिक में लगने वाले कुंभ को सिंहस्थकहा जाता है। 
हरिद्वार तथा प्रयागराज में 6 वर्ष के अन्तराल में अर्द्धकुंभ का आयोजन भी किया जाता है। 2019 में प्रयागराज में अर्द्धकुंभ का आयोजन किया गया था। 2021 में हरिद्वार में कुंभ का आयोजन किया जाना है।


kumbh mela

कुंभ स्नान की प्रमुख तिथियां

वैसे तो कुंभ मेले में स्नान का यह पर्व मकर संक्रांति से शुरू होकर अगले पचास दिनों तक चलता है। लेकिन इस कुंभ स्नान में कुछ ऐसी महत्वपूर्ण ज्योतिष तिथियां होती है। जिनका विशेष महत्व होता है, यहीं कारण है कि इन तिथियों को स्नान करने के लिए लाखों की संख्या  में श्रद्धालु तथा साधु इकट्ठे होते है।

कुंभ की महत्वपूर्ण तिथियां (DATE OF KUMBH MELA) निम्नलिखित है-

मकर संक्रांति, बसंत पंचमी, माघ पूर्णिमा, महाशिवरात्रि(प्रथम कुंभ शाही स्नान), चैत्र अमावस्या(द्वितीय कुंभ शाही स्नान), नवसंवत्सर, रामनवमी, बैशाखी(तृतीय कुंभ शाही स्नान), बैशाखी अमावस्या, अक्षय तृतीया तथा गंगा दशहरा।

Where is next Kumbh Mela ?

हरिद्वार में 2021 में Next Kumbh Mela मकरसंक्राति (जनवरी 2021) के पर्व से शुरू होकर गंगा दशहरा(जून 2021) तक चलेगा। 


शाही स्नान

शाही स्नान का कुंभ मेले में अपना अलग ही महत्व है, शाही स्नान की तिथियां पहले से ही निर्धारित कर दी जाती है। कहा जाता है कि आदि शंकराचार्य ने सनातन धर्म की रक्षा के लिए अखाडों की स्थापना की थी, वर्तमान में अखाड़ों की संख्या 13 है। 
ये अखाड़े केवल शाही स्नान के दिन ही कुंभ में भाग लेते हे और जलूस निकालकर नदी के तट पर पहुँचते है, यह नजारा देखने लायक होता है। शाही स्नान में सबसे पहले नागा सन्यासी स्नान करते है फिर उसके बाद अन्य अखाडें वरिष्ठता क्रम के अनुसार स्नान करते है, आम जनता को स्नान करने का अवसर बाद में मिलता है।

कुंभ मेले का अद्वितीय महत्व देखते हुए यूनेस्को ने 2017 में कुंभ मेले को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहरके रूप में मान्यता दी है। यह सभी भारतवासियों के लिए गर्व की बात है। 

Mansa Devi Temple

मनसा देवी मंदिर एक सक्तिपीठ पर हरिद्वार में स्थापित है | मनसा देवी को भगवान् शिव की मानस पुत्री के रूप में पूजा जाता है | कहा जाता है की माँ मनसा की शरण में आने वालों का कल्याण होता है | यह मंदिर शिवालिक पर्वतमाला पर विल्ब नामक पहाड़ी पर स्थित है | मनसा देवी को वासुकी नाग की बहन माना जाता है | मंदिर से देखने पर गंगा तथा  हरिद्वार के समतल मैदान दिखाई देते हैं| 

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