` उत्तराखंड के महापुरुष [ FAMOUS PERSONALITIES OF UTTARAKHAND ]

उत्तराखंड के महापुरुष [ FAMOUS PERSONALITIES OF UTTARAKHAND ]



उत्तराखंड सामान्य ज्ञान की आज की पोस्ट में कुछ ऐसे महापुरुषों का जिक्र किया गया है जिन्होंने उत्तराखंड को बनाने या फिर उत्तराखंड का विकास करने में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया | जिनमे से कुछ स्वतंत्रता सेनानी, कुछ साहित्यकार ,पत्रकार ,इतिहासकार तथा कुछ पर्यावरण प्रेमी रहे | अगर आप उनके संघर्ष तथा बलिदान के बारे में जानना चाहते है तो इस पोस्ट को अन्त तक पढ़ें |
उत्तराखंड के महापुरुष


FAMOUS PERSONALITIES OF UTTARAKHAND

बद्रीदत्त पाण्डेय

बद्रीदत्त पाण्डेय जी का मूल निवास तथा शिक्षा स्थल अल्मोड़ा में था | इनका जन्म  15 फरवरी 1882 में कनखल (HARIDWAR) में हुआ | 1913 से वे अल्मोड़ा से प्रकाशित "अल्मोड़ा अखबार" के संपादक थे किन्तु 1918 में अख़बार को प्रतिबंधित कर दिया गया क्योंकि ये अंग्रेजी शासन के प्रति बहुत कड़े तथा तीखे लेख लिखते थे | इसके बाद पाण्डेय जी ने अल्मोड़ा से शक्ति साप्ताहिक का प्रकाशन प्रारम्भ कर दिया |
कुली उतार, कुली बेगार तथा कुली बर्द्याश आदि प्रथाओं के विरुद्ध सफल नेतृत्व के लिए उन्हें "कुर्मांचल केसरी" की पदबी से विभूषित किया गया | जेल में रहकर इन्होने कुमाऊं का इतिहास लिखा |अपने जीवन में मिले दो स्वर्ण पदक इन्होने भारत- चीन युद्ध के समय देश के सुरक्षा कोष में दे दिए |13 जनवरी 1965 में इनका निधन हो गया |
 

कालू महरा

ये उत्तराखंड के प्रथम स्वंत्रता सेनानी थे, इनका जन्म 1831 में चम्पावत जिले के लोहाघाट में हुआ था |1857 की क्रांति के दौरान इन्होने कुमाऊं क्षेत्र में एक संगठन बनाया था जिसका नाम "क्रांतिवीर" था | इस गुप्त संगठन के जरिये इन्होने अंग्रेजों के खिलाफ आन्दोलन चलाया था | उस समय कुमाऊं के कमिश्नर हैनरी रैमजे थे | 1906 में इनका निधन हो गया था |
 

हरगोविंद पन्त

हरगोविंद पन्त जी का जन्म 19 मई 1885 में चितई गाँव अल्मोड़ा में हुआ था | कुमाऊं में ब्राहमणों डाके हल न चलाने की प्रथा को 1928 में बागेश्वर में उन्होंने स्वमं हल चलाकर तोड़ दिया था |
हरगोविंद पन्त जी को अल्मोड़ा कांग्रेस की रीढ़ कहा जाता है |भारत छोडो आन्दोलन के समय सबसे पहले इन्ही को नजरबन्द किया गया था | उनका निधन मई 1957 में हुआ |
 

पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त

गोविन्द बल्लभ पन्त जी का जन्म 10 सितम्बर, 1887 में अल्मोड़ा जनपद में हुआ था | नेहरु जी ने इन्हें "हिमालय पुत्र" की उपाधि से विभूषित किया था तथा उनकी प्रभावित होकर उनके सहपाठी उन्हें "गोविन्द बल्लभ (महाराट्र)" कहते थे | 1946 में उन्हें उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री बनने का गौरब प्राप्त हुआ | इलाहाबाद से कानून की डिग्री लेने के बाद इन्होने काशीपुर में वकालत शुरू कर दी तथा वह रहकर इन्होने "प्रेमसभा" की स्थापना की |
1946 में पुन:उत्तरप्रदेश विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए तहत मुख्यमंत्री बने | 26 जनवरी 1957 को गोबिंद बल्लभ पन्त जी को "भारत रत्न" की उपाधि से सम्मानित किया गया | 7 मार्च 1961 को इनका निधन हो गया |
 

हेमवती नंदन बहुगुणा

बहुगुणा जी का जन्म 25 अप्रैल 1919 में पौड़ी के बुधाडी गाँव में हुआ हुआ था |इन्हें "धरती पुत्र" तथा "हिमपुत्र" के नाम से भी जाना जाता है | उच्च शिक्षा के लिए ये इलाहाबाद आये थे और यहाँ छात्र आन्दोलन का नेतृत्व करने लगे |
1979 में उन्होंने लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी का गठन किया और अपनी पार्टी से गढ़वाल संसद्यीय सीट से विजयी होकर मंत्री बने | चरण सिंह के साथ मिलकर इन्होने दलित मजदूर किशान पार्टी का गठन किया तथा इलाहाबाद से संसदीय चुनाव में अमिताभ बच्चन जी से हार गए | 17 मार्च 1989 में इनका निधन हो गया |
 

सुमित्रानंदन पन्त

सुमित्रानंदन पन्त जी का जन्म 20 मई 1900 को बागेश्वर जिले के कौसानी में हुआ था तथा इनके बचपन का नाम गोसाई दत्त था | इन्होने अपनी उच्च शिक्षा इलाहाबाद से की तथा 10 वर्ष यही रहे | इन्होने यहाँ रहकर " वीणा " एवं " पल्लव " की अधिकांश रचनाएँ की | "आल इण्डिया रेडियो" का नाम "आकाशवाणी" इन्ही के सुझाव पर किया गया |
इन्होने वर्ष 1938 में रूपाभ नामक प्रगतिशील मासिक पत्रिका का संपादन किया | काव्य क्षेत्र में उनका प्रवेश 18 वर्ष की आयु में हो गया था | सुमित्रानंदन पन्त जी सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" तथा महादेवी वर्मा के पास एक छायावादी कवी थे |
 

पंडित नैनसिंह रावत

इनका जन्म 1830 में मिलम (मुनस्यारी ,पिथोरागढ़) में हुआ था| नैनसिंह रावत जी अध्यापक होने के कारण पंडित के नाम से लोकप्रिय थे |इन्होने तिब्बत की "थोकजातुंग नामक सोने की खान" का सर्वेक्षण किया | इस सर्वेक्षण के लिए ब्रिटिश सरकार ने इन्हें कम्पैनियन ऑफ़ इंडियन एम्पायर अलंकर से विभूषित किया |यह पदक प्राप्त करने वाले वो पहले भारतीय थे | इसके अतिरिक्त तत्कालीन वायसराय द्वारा रूहेलखंड के मुरादाबाद गाँव की जागीर भी उन्हें प्राप्त हुई थी |


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